मेरी माँ (हिंदी कविता) Meri Maa (Hindi Poem)

मेरी माँ…

जग देखा, संसार देखा

पर माँ जैसा ना मैंने कोई इंसान देखा।

मारकर अपने हर अरमानों को

उसे हमारे अरमानों को पूरा करते देखा।

जाग-जाग कर रातों को

वो मुझे प्यार की थपकी देती है।

ममता के गहरे सागर में

वो प्रेम के गोते हरपल लगाती है।

आँखों में आसूं देखकर मेरे

वो मुझसे भी ज्यादा रोती है।

देख किसी संकट को मुझ पे

वो अपने आंचल में छुपा लेती है।

जो रूठ जाऊँ अगर मैं उससे

वो प्यार से मुझे मनाती है।

डाट- डाट कर रातो को

वो खाना रोज खिलाती है।

ये घर भी शमशान सा लगता है

जब वो आंखों से ओझल होती है।

वो मेरी हर खुशी की खातिर

अपने दर्द को छुपा लेती है।

सचमुच! मैंने सारा संसार देखा

पर माँ जैसा ना कोई इंसान देखा।

🙏🙏🙏🙏

लेखक – सोनू कुमारी

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