दहेज प्रथा पर निबंध - Essay on dowry system in Hindi

Essay on dowry system in Hindi: दहेज प्रथा एक ऐसा अभिशाप बन गया है जो आज भी हमारे समाज में विधमान है. उन लोगों के कारण जो दहेज के लालची है. दहेज का मतलब यह है कि वहां धन, संपत्ति, टी वी, फ्रिज, कार आदि जो दुल्हन के परिवार वाले दूल्हे और उनके परिवार को देते हैं. वह दहेज प्रथा (Dowry System) कहलाती है. इस प्रथा पर बहुत से कानून भी बने हैं, किन्तु इन कानूनों के बावजूद यह दहेज प्रथा (Dowry System) आज भी कायम है. यह प्रथा आज की नहीं है यह भारत और भारत जैसे कई देशों में वर्षों से चली आ रही है जो कि इस समाज की कई बुरी प्रथाओं में से एक है

 

दहेज प्रथा (Dowry System) क्या है?

दहेज प्रथा वह है जो दुल्हन शादी के बाद जो समान लेके जाती है जैसे – टी वी, फ्रिज, कूलर, ए सी आदि को दहेज कहा जाता है. यह सब प्राचीन काल में दुल्हन के परिवार वाले अपनी खुशी से अपनी बेटियों को दिया करते थे जिसे धीरे धीरे लोगों ने एक प्रथा का रूप दे दिया और तब से यह आज तक बरकरार है. जिसे लोगों ने दहेज प्रथा (Dowry System) का नाम दे दिया.

 

दहेज प्रथा (Dowry System) एक अभिशाप है, कैसे ?

दहेज प्रथा एक अभिशाप है क्योंकि जो माता पिता इसे नही दे पाते हैं. तो उनकी बेटी की बरात या तो मंडप से वापस चली जाती है या फिर अगर शादी हो गई तो जीवन भर उनकी बेटी को ससुराल वाले ताने मारते रहते हैं. कही कही तो अपने बेटे की दूसरी शादी करने के चक्कर में ससुराल वाले बहू को जला के मार देते हैं. तो कही उसे मारते पीटते है.

यह एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था बन गई है. जिसकी वजह से आज लोग अपनी पत्नि की गर्भवती होने की बात सुनते हैं तो सबसे पहले लिंग जाँच करते हैं और यदि लड़की हुई तो उसे गर्भ में ही मार डालते हैं. यह प्रथा महिलाओं के लिए एक ऐसा अभिशप है जो न जाने कब खत्म होगी.

 

दहेज प्रथा (Dowry System) को लेकर लोगों की मान्यतायें :

दहेज प्रथा को लेकर लोगों की काफी सारी मान्यताये है. जब सरकार द्वारा कई कानून बनाए गए इस प्रथा को लेकर और इसे एक दंडनीय अपराध घोषित किए जाने के बाद भी लोगों का कहना है कि यह एक जरुरी प्रथा जो सदियों से चली आ रही है तो वो इसे कैसे तोड़ देगे. यदि उन्होंने ऐसा नही किया तो समाज में उनकी इज्जत नही रहेंगी. इसके अलावा कई कारण है इस प्रथा को आज भी मानने के लिए जैसे –

* परंपरा के नाम पर : पहला की लोग इसे इसलिए मानते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ये उनकी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है. दूल्हे वाले और उनके परिवार वाले दुल्हन के समान से यह अनुमान लगते हैं कि लड़की कितना दहेज लेकर आइये जिसमे नकद राशि, कपड़े , फर्नीचर आदि होता है. यह प्रचलन वर्षों से चला आ रहा है.

जब भी शादी जैसे कोई अवसर होता है तो दुल्हन के घर वाले इस परंपरा को नजरअंदाज नहीं कर पाते हैं. लोग इस परंपरा नामक अपराध का बहुत ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं. जबकि कुछ दुल्हन के परिवार वालो के लिए यह प्रथा एक बोझ बन गई है.

*प्रतिष्ठा का प्रतीक : दूसरा लोगों का यह भी कहना था कि यदि दुल्हन दहेज में कुछ नहीं लाती है तो उनका समाज के सामने छवि खराब हो जाती हैं. तो वही दूसरी तरफ अगर कोई दुल्हन खूब दहेज लाती है फिर चाहे उसके माता पिता की उतनी हैसियत हो या नहीं पर समाज में अपनी प्रतिष्ठा वो तभी कायम रख पाएंगे जब दुल्हन को खूब धन दिया जाता है.

* सख्त कानून का अभाव : सरकार ने भी दहेज प्रथा को एक दंडनीय अपराध माना है और इसको रोकने के लिए कई सारे कानून भी बनाए गए हैं. किन्तु उनका सख्ती से कभी भी पालन नहीं किया गया है. आज भी लोग शादियों दूल्हे ,दूल्हे के परिवार वालों को उपहार के नाम पर न जाने कितना दहेज लिया जाता है.

 

दहेज निषेध अधिनियम 1961 :

इस अधिनियम के अनुसार दहेज लेने और देने दोनों पर ही सख्त कानून बने थे. इस अधिनियम में यह था कि यदि कोई दहेज लेता या देता हुआ मिलता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा. 5साल कैद और 15000 रुपये नकद राशि या फिर कोई आदि यह कार्य चोरी चुपे करता है तो 6 महीने कैद और 10000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा. दहेज की राशि पर भी जुर्माना निर्भर करता है. इन सब के बावजूद दहेज लिया और दिया दोनों ही जाता है.

 

घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 से महिला का संरक्षण :

यह नियम भी बनाया गया है जिससे यदि शादी में कई परिवार दहेज नही देता है तो उसे उसके ससुराल वाले भावनात्मक और शरीरिक रूप से दुर्व्यवहार कर उसे कष्ट पहुंचा सकते हैं. इसलिए इन सब को रोकने के लिए यह अधिनियम 2005 में बनाया गया था. जिससे महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को खत्म किया जा सकें.

 

दहेज प्रथा (Dowry System) को लेकर जागरूकता :

दहेज प्रथा को लेकर लोगों में काफी सारे जागरूकता अभियान चलाया गया था और जिसे आज भी चलाया जाता है, जैसे – महिला शसक्तिकरण, शिक्षा की प्राप्ति के लिए निःशुल्क व्यवस्था, लैगिंक समानता आदि। किन्तु फिर भी यह व्यवस्था समाज में से खत्म होने का नाम ही नही लेती इसने अपनी जड़े इतनी अधिक फैला ली है और मजबूत कर ली है. इसे कोई कानून भी नही रोक पा रहा है.

कुछ महिलाएं तो बच जाती है जिन्हें इन कानूनों का ज्ञान है किन्तु कुछ नही बच पाती है. क्योंकि या तो वह पढ़ी लिखी नही होती है या फिर इन कानूनों के बारे में उन्हें पता नही होता है. जिस कारण उनके साथ बुरा वर्ताव होता है जैसे – शरीरिक शोषण, कन्या भ्रूण हत्या आदि का शिकार होती हैं.

 

निष्कर्ष :

दहेज प्रथा एक ऐसी पीड़ा और एक ऐसा रोग है जो लड़का और लड़की दोनों के जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता ही है इसलिए हमें इन कुरीतियों का बहिष्कार करना चाहिए. ताकि इन कुरीतियों की वजह से किसी मासूम बच्ची को गर्भ में न मारा जाए और न ही विवाह उपरांत उनको कष्ट दिया जाए. जो कानून व्यवस्था बनाई गई है उनका सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि आगे और किसी के साथ ऐसा न हो.

(ज्योति कुमारी)

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