गुरुनानक देव जी की जीवनी – Guru Nanak Biography in Hindi

Guru Nanak Biography in Hindi : गुरु नानक देव जी की जीवनी – आज के आर्टिकल में आपको बताया जाएगा कि गुरुनानक जी ने ऐसे क्या काम किए जिससे आज उन्हें इतना मान-सामान दिया जाता है इतिहास में उनका  नाम इतना क्यों प्रचलित है? यह सभी कारण आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपको जानने को मिलेंगे। साथ ही गुरु नानक देव जी के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी मिलेगी।

 

गुरु नानक कौन थे।

गुरु नानक सिख धर्म के पहले संथापक थे। जिन्होंने सबसे पहले सिख धर्म का प्रचार प्रसार किया साथ ही देशभक्त, योगी, धर्म सुधारक, समाज सुधारक आदि थे। गुरुनानक देव जी ने अपने ज्ञान व शिक्षा के जरिए लोगों को अच्छाई व सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए कहा। चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम सभी को एक साथ प्रेम से रहने के लिए उपदेश दिए। गुरुनानक देव जी ने सभी मूर्ति पूजा, आडंबरों, व अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई उन्होंने यह बताया कि भगवान एक है। हम जैसा करते हैं हमें फल भी वैसा ही मिलता है।

कुछ इस प्रकार के उपदेश उनके द्वारा दिए गए। इन्होंने अलग-अलग जगह पर यात्रा करके सिख धर्म का प्रचार किया। गुरू नानक जी ने हिन्दू हो या मुस्लिम सभी को अपना शिष्य बनाया। उन्हें यही बताया कि छल कपट से दूर रह कर अपने मन में प्रेम भावना जगाए। इसलिए इतिहास में आज इनका नाम व शिक्षाएं प्रचलित है। चलिए दोस्तो जानते हैं गुरुनानक देव जी की जीवनी।

 

गुरुनानक देव जी का आरंभिक जीवन

 

गुरुनानक जी का जन्म।

गुरुनानक देव जी का जन्म 30 नवंबर 1469 को पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में हुआ था। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इनका जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम कल्याण था। माता का नाम तृप्ति था। इनका परिवार हिन्दू  था।

 

बचपन का दौर।

बचपन से ही गुरुनानक जी बुद्धिमान, विचारशील, विवेकशील थे। नानक जी ने 7 साल की उम्र में ही हिन्दी व संस्कृत पढ़ना सीख लिया था। धीरे-धीरे वह पढ़ाई में इतने होशियार हो गए थे कि अपने आसपास सबसे ज्यादा पढ़े लिखे थे। इस्लाम धर्म यहूदी धर्म के बारे में भी वह जानकारी प्राप्त कर चुके थे। उनका मानना था कि भगवान हमारे ही भीतर मौजूद है। इसलिए हमे किसी भी धर्म जाति लिंग के आधार पर एक दूसरे से भेदभाव नहीं करना चाहिए। बल्कि एक जुट होकर रहना चाहिए। गुरुनानक देव जी द्वारा दी गई शिक्षाएं गुरु ग्रंथ साहिब में प्रचलित है।

तब वह और बड़े हुए तो उनके पिता ने उन्हें व्यापार करने के लिए कहा। गुरुनानक अपने व्यापार से जो भी कमाते वह सब भुखो को खाना खिलाने में लगा देते थे। तभी से लंगर खिलाने की प्रथा शुरू हुई थी। जो आज भी प्रचलित है। इसके बाद जब वह घर खाली हाथ लौटकर गए तो पिता ने उन्हें सजा दी। लेकिन उन्हें फिर भी कोई फर्क ना पड़ा। साथ ही उन्होने कहा कि निस्वार्थ सेवा ही असली धर्म है।

 

विवाह

गुरुनानक देव जी का विवाह सन् 1485 में 16 साल की उम्र में हुआ था। उनका विवाह गुरुदास पुर जिले में लाखोकी नामक गांव में रहने वाली सुलक्षणी के साथ हुआ था। फिर शादी के बाद उनके दो पुत्र हुए एक का नाम श्री चन्द्र दूसरे का नाम लखमी दास था।

 

गुरुनानक जी ने समाज के प्रति एहम कार्य किए जो इस प्रकार है।

 

जनेऊ धारण करने के खिलाफ उठाई आवाज।

गुरुनानक ने बचपन से ही आडंबरों अंधविश्वास कुरीति मूर्ति पूजा आदि के विरूद्ध थे। गुरु नानक जब 11 साल के थे तब उनके पिता ने जनेऊ धारण करने का फैसला किया। जो हिन्दू धर्म की एक मान्यता व परंपरा है। साथ ही उनके पिता ने बहुत ही धूमधाम से यह परंपरा का आयोजन रखा था। जिसमे उन्होंने अपने सभी दोस्तों रिश्तेदारों आदि को आमंत्रण दिया था। उसके बाद पंडित जी को बुलाया गया। और जब वह पंडित जनेऊ उनके गले में डाल रहे थे तो उन्होंने यह जनेऊ पहनने से इन्कार कर दिया था।

साथ ही गुरुनानक देव जी ने यह कहा कि मुझे इस धागे पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। क्योंकि यह कुछ दिनों बाद गंदा व मेहला हो कर टूट जाएगा। तो यह जनेऊ आत्मिक जन्म के लिए कैसे हो सकता है? इसके लिए तो कोई और जनेऊ होना चाहिए। और यह भी कहा कि इस साधारण धागे को गले में डालने से मन पवित्र नहीं होता बल्कि अच्छे कर्म करने से पवित्र होता है। इस तरह की हिन्दू धर्म में कई कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाई और सभी को एक अच्छा इंसान बनने की सलाह दी।

 

अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई।

गुरुनानक ने अपने बचपन से ही कुप्रथा अंधविश्वास जैसी  प्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई। और हमेशा ऐसी रूढ़िवादिता को नकारा व काफी विरोथ किया था। साथ ही उन्होने काफी समय तक तीर्थ यात्रा भी की थी। जो भी धार्मिक लोग उनसे टकराते उन्हें वह उनकी कमियाँ बता कर उन्हें धार्मिक आडंबरों से दूर रहने को कहा करते थे।

साथ ही गुरु नानक जी की यह मान्यता थी कि मनुष्य के भीतर ही ईश्वर होता है। अगर वह छल कपाट घृणा जैसी चीजों से दूर रह कर एक निस्वार्थ प्रेम भावना अपने भीतर रखे। तो ईश्वर हमेशा उस इंसान के साथ होता है।

गुरु नानक जी के उपदेश व शिक्षाएं।

*ईश्वर एक है।

* हमेशा एक ही ईश्वर की अराधना करें।

*ईमानदारी सच्चाई अच्छाई कड़े परिश्रम से ही धन कमाना चाहिए।

*हमेशा खुश रहना चाहिए और ईश्वर का शुक्रगुजार होना चाहिए।

*महिला पुरुष दोनों ही एक समान होते हैं। दोनों को ही आदर सम्मान मिलना चाहिए।

*सभी के साथ बिना ईर्ष्या किए व प्रेम भावना के साथ रहना चाहिए।

* कभी किसी का दिल ना दुखाए और बुरे कर्म से बचे।

*लालच कपट बहुत ही बुरी बला है। लालच लोभ ही इंसान से सारी खुशियां छीन लेती है।

*कभी किसी का बूरा नहीं सोचना चाहिए ना ही किसी के साथ बुरा करें।

 

मृत्यु।

गुरुनानक देव जी बहुत ही लोगो के बीच लोकप्रिय हो गए थे। साथ ही उन्हें बहुत ही मान समान मिला आज भी इनके शिष्य बहुत ही प्रेम करते हैं। इनकी कहीं बातो को भी मानते हैं। इनकी मृत्यु 1539 ईसवी में इनकी मृत्यु कतारपुर नामक शहर में हुई थी जो अब पाकिस्तान में है।

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