गाय पर निबंध – Essay on cow in Hindi

Essay on cow in Hindi | गाय पर निबंध : गाय एक घरेलू पशु हैं. जिससे प्राचीन काल से ही राजा महाराजाओं ने भी पूजनीय माना है. वह गौ रक्षा को अपना धर्म मानते थे. गाय एक बहुत ही उपयोगी पशु हैं क्योंकि यह हमें दूध देती हैं. जिससे हम कई तरह के व्यजंन बना सकते हैं. गाय एक ऐसी पशु हैं जिसका तो गोबर भी हमारे काम में आता है. जिसका हम उपले बना कर प्रयोग कर सकते हैं. प्राचीन काल में भी यह ही होता था. हमारे भारत देश में गौ हत्या को दण्डनीय अपराध माना जाता है. प्राचीन काल में लोगों की समृद्धि की पहचान गाय की संख्या से किया जाता था. आज भी हमे कोई जगह पर गाय लोगों को पालते हुए देखा सकते हैं.  आईये जाते हैं विस्तार से…….

 

गाय के बारे में | Essay on cow in Hindi

गाय एक घरेलू पशु है. जिसकी शारिरिक रचना कुछ इस प्रकार है. गाय का एक मुँह, दो आंखे, दो कान, चार पैर, एक पूछ, चार थन, चार नथुने तथा दो सींग होते हैं. गाय की पूछ लंबी होती हैं और पूछ के अंत में  बालों गुच्छा होता हैं. जिसे वह मक्खियां उड़ाती है. गाय के पैर के नीचेवाले भाग में खुर होते हैं. जो उन्हें राह के कंकर पत्थर से बचाते हैं.

Essay on cow in Hindi

 

गाय की प्रजाति कितनी प्रकार की होती हैं ?

गाय की भी प्रजाति कई सारी होती है. जिसमें से कुछ गाय के सींग नहीं होता है. गाय वैसे तो कई नस्ल की होती हैं लेकिन भारत मे पाए जाने वाली नस्लें हैं जैसे –

साहिवाल – दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार।

गीर – दक्षिण काठियावाड़

करन फ्राइ – राजस्थान

थारपारकर – कच्छ, जोधपुर, जैसलमेर

यह सब भारत में पाए जाते हैं और भी है जो भारत में आपको देखने को मिल जाएंगे. जर्सी गाय जो काफी लोकप्रिय है. यह गाय विदेशी गाय है इसलिए यह आपको विदेशों में देखने को मिल जाएंगे. जर्सी गाय बाकि गायों के मुकाबले दूध भी अधिक मात्रा में देती हैं.भारतीय और विदेशी गायों में एक अंतर और हैं वह हैं कि भारतीय गाय विदेशी गाय के मुकाबले कद काठी में छोटी होती हैं जबकि वह बड़ी होती हैं.

 

गायों के रंग कितने प्रकार के होते हैं ?

गायों के रंग कई प्रकार के होते है. जिसमें से जो अधिक देखने को मिलते हैं. वो हैं, लाल, काला, सफ़ेद, बादामी और चितकबरी रंग के होते हैं.

 

गाय की उपयोगिता का महत्व :

गाय एक उपयोगी घरेलू पशु के साथ साथ पूजनीय पशु भी है. जिसे ज्यादातर किसान पालते हैं. बैलों और गायों होने से हम खेतों में जुताई कर पाते हैं. गाय का गोबर खाद का भी कम करता है. जिससे किसानों की फ़सल काफी अच्छी होती हैं. गाय के गोबर वाला खाद तो हम अपने आस पास ही लोगों को प्रयोग करते हुए भी देख सकते हैं क्योंकि आज के समय में हर कोई घर के अंदर या बाहर पेड़ पौधे लगता ही है.

गाय का दूध काफी पौष्टिक होता हैं जो बच्चों और बीमार व्यक्ति के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होता है. इसलिए इसे बेहद उपयोगी आहार माना जाता है. खासतौर पर बीमारी में. गाय के दूध से बनी घी और गोमूत्र आयुवेर्दिक चिकित्सा में भी बहुत लाभदायक होती हैं. इससे कई प्रकार की औषधियां बनाई जाती है.

गाय का गोबर भी काफी उपयोगी साबित हुआ है. इससे लोग उपले बनाकर उससे बेचते हैं तथा चुहला में जलाकर भोजन भी पकाया जाता है. यह आपको गांव में ज्यादा देखने को मिलेगा क्योंकि शहरों में इसका प्रयोग कोई नहीं करता कुछ लोग होंगे जो करते होंगे क्योंकि ऐसे लोग अपनी मिट्टी से जुड़े रहने में अधिक विश्वास करते हैं. गांव में आज भी गाय के गोबर से घर को निप कर ही पवित्र किया जाता है. इसका लाभ यह है कि घर में क्रीडे नही आते घर में.

गाय से हमे बहुत कुछ प्राप्त होता है. इसलिए प्राचीन काल में इसे कामधेनु भी कहा जाता था. गाय से हमे दुध भी प्राप्त होता हैं. जिससे हम काफी सारे रूप दे पाते हैं. जैसे – दूध, घी, मक्खन और पनीर आदि के साथ साथ और भी चीजें हैं. जो पकवानो में बनाई जाती है.

 

गाय के दूध को लेकर लोगों की धारण :

जैसा कि हम जानते हैं कि बाकी पशु की तुलना में गाय के दूध को पीने की सलाह सभी देते हैं. खासतौर पर बच्चों के लिए. कहते हैं भैंस का दूध बच्चों में आलस लाता है तो वही गाय का दूध बच्चों को चंचलता लाता है क्योंकि भैंस का बच्चा दूध पीने के बाद सौ जाता है तो वही गाय का बछड़ा दूध पीने के बाद खेल कूद करता है. इसलिए गाय के दूध को उत्तम माना जाता है.

Essay on cow in Hindi

गाय का धार्मिक महत्व :

जैसा कि हम जानते हैं भारत मे गाय को पूजनीय माना जाता है. प्राचीन काल में लोग इसे कामधेनु गाय कहते थे और इसे देवी का रूप मानते थे. ऐसा माना जाता है कि इसमें 33 करोड़ देवी देवता का निवास है. इसलिय दीवाली के अगले दिन ही गोवर्धन पूजा की जाती हैं. जिसमे लोग गाय को मोर पंख आदि वस्तुओं से सजा कर  पूजते हैं.

प्राचीन काल में जब आक्रमण करी भारत मे लूट पट करते थे तो वह धन आभूषण के साथ साथ गाय को भी लूट कर ले जाते थे. तब के समय में लोग की पहचान गाय की संख्या पर ही निर्भर करता था. जिसके पास जितनी गाय वह उतना ही समृद्ध माना जाता था. राज्यो की सम्पन्नता और मजबूती के लिए गाय की संख्या पर ही निर्भर करता है. प्राचीन काल में गाय ही समृद्धि का प्रमुख कारण थीं. एक तरफ से हम यह भी कह सकते हैं कि तब गाय रीढ़ की हड्डी हुआ करती थी.

 

गाय की मृत्यु उपरांत :

गाय एक उपयोगी पशु है. एक ऐसी पशु जो मृत्यु उपरांत भी बहुत काम मे आती हैं. गाय की मृत्यु के बाद उसके शरीर का एक एक अंग काम में आता है जैसे – सींग, चमड़ा और खुर यह सब मनुष्य के दैनिक जीवनयापन के वास्तु बनाने के काम मे आते हैं. गाय की हड्डी खेती में काफ़ी उपयोगी और लाभदायक होती है.

 

निष्कर्ष :

गाय का मनुष्य के जीवन मे काफ़ी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. आज भी ग्रमीण क्षेत्र में गाय को ही रीढ़ माना जाता है क्योंकि शहरों के विकास होने के कारण गाय की आवश्यकता काम होती जा रही है. आज तो हाल ऐसा है कि गाय को मृत्यु भी असमय हो रही है क्योंकि लोग पॉलीथिन का उपयोग कर इधर उधर फैक देते हैं . जिसे गाय खा जाती हैं और असमय मृत्यु को प्राप्त हो जाती है. इसलिए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम इधर उधर पॉलीथिन बैग को न फैके और गाय या गोवंश को बचाया जा सकें.

(ज्योति कुमारी )

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