Shiksha Ka Mahatva Par Nibandh – About Education in Hindi

Essay on education in Hindi: शिक्षा एक ऐसा अधिकार है जो हर मनुष्य को जन्म से प्राप्त है. किसी भी बच्चे की पहली पाठशाला उसके परिवार वाले होते हैं और पहली गुरु उसकी मां होती है. जो उसे इस नई दुनिया में सामंजस्य बिठाने में मदद करती है. साथ ही शब्दों को बोलने और सिखाने में भी मदद करती है.

किसी भी मनुष्य या बच्चे के लिए शिक्षा वह अस्त्र है जिससे वह किसी भी समस्या का सामना कर सकता है साथ ही सही गलत का भेद भाव भी समझ सकता हैं. शिक्षा एक ऐसा महत्वपूर्ण उपकरण बना गया है लोगो के लिए जो उन्हें पृथ्वी के बाकी जीवित प्राणियों से अलग करती है. शिक्षा लोगों को चतुर और सशक्त बनाने का माध्यम है. जिससे वो अपने ऊपर होने वाले अन्याय से लड़ सकता है.

शिक्षा क्या है? | About Education in Hindi

शिक्षा वो है जो हमे संसार का ज्ञान प्राप्त करने और उसे समझने में सहायता करती है. शिक्षा शब्द जो कि संस्कृत के शब्द “शिक्ष” धातु से लिया गया है. जिसका का अर्थ है सीखना या सिखाना. मतलब जिस के द्वारा हम अध्ययन या अध्यापन करते हैं. उसी को शिक्षा कहते हैं.

शिक्षा की परिभाषा | Definition of education in Hindi

शिक्षा एक ऐसा विषय है जिसकी परिभाषा अनेको है क्योंकि भारत के अनेकों बुद्धिमान व्यक्ति ने इसकी अनेकों परिभाषाओं से परिभाषित किया है जैसे –

* टैगोर के अनुसार, शिक्षा हमारे स्वार्थ पर आधारित है, परीक्षा में पास होने के इरादे से की जाती है. जल्द से जल्द नौकरी पाने का माध्यम बन कर रह गई है. जिसके के लिए माता पिता बचपन से हमें नियमों, परिभाषाओं, तथ्य और विचारों को रटने की आदत लगा देते है. जो हमे तो देना छोड़ो हमे यह प्रेरित भी नही करती है. जिससे हम थोड़ी देर बैठ कर इसपे सोचे और इसे अपने जीवन में आत्मसात कर सकें.

*गीता के अनुसार, सा विद्या विमुक्ते. मतलब शिक्षा या विधा वह है जो हमें हर बंधनों से मुक्त करती है और हमारे हर पहलु पर विस्तार करती है.

*अरस्तु के अनुसार, शिक्षा मनुष्य की शक्तियों का विकास करती है. सबसे ज्यादा मानसिक शक्ति का विकास करती है. ताकि हम परम् सत्य का चिंतन करने योग्य बना सकें.

*स्वामी विवेकानंद के अनुसार, शिक्षा मनुष्य के अंदर ही निहित है जो मनुष्य को पूर्णता की अभिव्यक्ति करता है.

ऐसे और भी बुध्दिमान है जिन्होंने शिक्षा की परिभाषा को अनेकों रूप में परिभाषित किया है. जिससे मनुष्य अपने बारे में जान कर अपना विकास कर सकते हैं.

अम्बेडकर के अनुसार, शिक्षा शेरनी का वो दूध है जो पियेगा वो दहाड़ेगा, और उन्होंने कहा है शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.

शिक्षा का अधिकार | Right to EducationEducation in Hindi

शिक्षा पाने का अधिकार हर प्राणी का जन्म से ही है. यह हमारे संविधान के 46वें संशोधन 2002 में मौलिक अधिकारों में कर दिया गया है. और कहा गया है कि हर बच्चे को अनिवार्य शिक्षा मिलनी ही चाहिए. जिससे 14 वर्ष के आयु तक के हर बच्चे को निःशुल्क शिक्षा दी जाएगी. 2009 में “निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम” लाया गया था. शिक्षा का अधिकार हमारे मूल अधिकारों में से एक है जो संविधान के 21अ में जोड़ा गया और और प्रभाव में 1 अप्रैल 2010 में लाया गया था. इस शिक्षा के अधिकार (आर टी आई एक्ट) निम्न बातें बताई गई है जैसे –

1. इस अधिनियम के अनुसार,  किसी भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान है. जो अनिवार्य शिक्षा फील हाल 8वीं कक्षा तक ही मानी जाती है.

2. शिक्षा का अधिकार में यह कानून दिया गया है कि हर एक बच्चे और उसमें कार्य शिक्षक है, कितनी कक्षाएं है, लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय होना चाहिए, पीने के पानी की सुविधा, स्कूली-कार्य दिवस की संख्या, शिक्षक के कार्य करने के घंटे से संबंधित मापदंड और मानक है.

3. इसमे उन बच्चों के लिए भी नियम व प्रावधान है जो बच्चे किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाते है.

4. यह प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति भी करता है.

5. प्राथमिक विद्यालय से मध्य विद्यालय तक यह निर्धारित न्यूनतम मानक बनाए रखने के लिए इन मानदंडों का पालन करना अनिवार्य है.

शिक्षा पर पड़ रहे आधुनिक प्रभाव | Online Shiksha Ka Mahatva Essay on education in Hindi

शिक्षा किसी भी मनुष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. किसी भी राष्ट्र या समाज में शिक्षा सामाजिक नियंत्रण, व्यक्तिगत निर्माण अथवा सामाजिक व आथिर्क प्रगति का मापदंड होता है. हम सभी को पता है कि प्राचीन काल के समय में लोगों को अपने बच्चों को गुरुकुल आदि जगह पर भेजते थे. वो भी ज्ञान प्राप्ति के लिए जाते हैं और वह का सारा काम भी करते थे उसके पश्चात गुरु से ज्ञान.

तब बच्चे एक पेड़ के निचे बैठ के कड़ी धूप में पढ़ाई करते थे, किंतु आज के समय में ऐसा नहीं है. आज न जाने कितने सारे तकनीकी उपकरण आ गए हैं. बच्चों के पढ़ने के लिए, जैसे – कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रोजेक्ट, मोबाईल फोन आदि चीजों से बच्चों को पढ़ाया जाता है और आज वर्तमान में जब कोरोना काल चल रहा है तो सब कुछ इन्हीं उपकरण पर निर्भर हो गया है. एक तरफ से यह उपकरण भी एक अहम भूमिका निभा रहे हैं.

शिक्षा प्रणाली | Education System

भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का प्रतिरूप है. जिसे सन 1835ई में लागू किया गया था. जिस तीव्र गति से यह भारत के सामाजिक राजनैतिक व आर्थिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है. इसे देखते हुए हमें बहुत जल्द देश की पृष्ठभूमि, उद्देश्य व चुनौती पर अवलोकन करने की जरूरत पड़ेगी.

सन 1835 ई में जब वर्तमान शिक्षा प्रणाली की नींव रखी गई थी तब मैकाले ने यह बात स्पष्ट रूप से कही थी कि अंग्रेजी भाषा की शिक्षा का केवल एक उद्देश्य होगा भारत की प्रशासन व्यवस्था में बिचौलिए का कार्य करेंगी. किन्तु आज के समय में हिंदी आये या न आए अंग्रेजी को हर कार्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण बना दिया गया है. जिस वजह से जिसे हिंदी नही आती हैं उसे कोई अच्छे पद की प्राप्ति नही होती, वही अगर अंग्रेजी आती हैं तो अच्छे से अच्छा पद आपको दिया जाता है.

निष्कर्ष :

यह शिक्षा नगर तथा उच्च वर्ग केंद्रीय, क्षम तथा बौद्धिक कार्यो से रहित थी. इस शिक्षा प्रणाली की बुराइयों को सवर्प्रथम गांधी जी ने 1917 में देखा और कहा कि यह अंग्रेजी शिक्षा ने हमारे मातृभाषा की अहमियत कम कर दी है और लोगों को यह समझने का प्रयास भी किया और हिंदी के पक्ष को लोगों के सामने राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे तरीके से रखा. शिक्षा हर मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है और यह सबको प्राप्त होनी चाहिए. जिससे लोग अपने विकास के साथ देश का भी विकास कर सकने में सक्षम हो सकें.

-ज्योति कुमारी

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