मेरी रुचि पर निबंध – Essay on my Hobby/Interest in Hindi

Essay on my Hobby/Interest in Hindi: रुचि वह होती है जो हर व्यक्ति की अलग अलग होती है। जैसे किसी को बैटमिंटन खेलना अच्छा लगता है तो किसी को पढ़ना पसंद होता है। तो किसी को डांस करना, गाना गाना, किसी को प्राचीन इतिहास को जानने में रुचि होती है ऐसी और भी रुचियाँ रुचि होती हैं। इस प्रकार की रुचि सभी बड़े से लेकर बच्चों तक में मौजूद होती है।

रुचियाँ हमारी जिंदगी में एक अहम भूमिका निभाती है। रुचियाँ हमारे जीवन को एक लक्ष्य देने और आनंदमय बनने का काम करती है। आज हम देख सकते हैं कि कई बच्चे अपनी रुचियों के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करने की जगह अपने माता पिता के सपनों को पूरा करने में लगे रहते हैं फिर चाहे उनकी रुचि हो या न हो।

रुचि का अर्थ :

रुचि एक ऐसी भावना है। जो हर किसी को अन्नदित कर देती है। जो मनुष्य के अंदर न जाने कब घर कर जाती है और उसे पता भी नही चलता है। जो हर व्यक्ति में मौजूद होती है। इससे उसे अपने रुचि के अनुसार अपना भविष्य निर्धारित करने में आसानी होती हैं। अपने लक्ष्य की प्राप्ति में आने वाली समस्या का सामना भी फिर वह मन लगा के करता है और कभी भी उन समस्याओं से घबराता नहीं है। इसे ही रुचि कहते हैं।

रुचि के प्रकार :Essay on my interest in Hindi

रुचि एक ऐसी चीज है। जो हर मनुष्य की अलग अलग होती हैं जैसे –

डॉक्टर बनना

इंजीनियर बनना

शिक्षक बनना

लेक्चर आर्ट बनना

पायलेट बनना

संगीत कार बनना

नृत्य शिक्षक बनना

शेफ़ बनना

कलेक्टर बनना

होम ट्यूटर बनना

टेलर बनना

पलम्बर बनना

इलेक्ट्रिशियन बनना

बिज़नेसमैन बनना

न जाने ऐसी कितनी सारी रुचियाँ हैं। जो मनुष्य को अपना लक्ष्य निर्धारित करने में सहायता करती हैं।

नोट : रुचि और शौक दोनों अलग अलग होते हैं। कई लोगों  को यह ग़लतफहमी होती हैं कि रुचि और शौक एक ही है।

रुचि और शौक में अंतर :

रुचि वह होती हैं जिसे हम हर समय करते हैं। जैसे कोई क्रिकेट खेलता है हर समय क्योंकि उसे क्रिकेट में अपना भविष्य बनाना है। इसे रुचि कहेंगे। तो वही दूसरी तरफ शौक वह हो गया। जो हम समय बीतने के लिए करते हैं। जैसे हम खाली बैठे हैं तो थोड़ा क्रिकेट खेल लिया या फिर पुस्तकें पढ़ ली आदि यह सब शौक है रुचि नहीं।

* रुचि – जिसे हम हर समय करना पसंद करते हैं। जिसे करने से हम ऊबते नही हैं, बल्कि आनंदित होते हैं। उसे रुचि कहते हैं।

* शौक – जिसे हम सिर्फ खाली समय में ही करते हैं। एक तरफ से कह सकते है समय बीतने के लिए। उसे शौक कहते हैं।

रुचि का महत्व :Essay on my interest in Hindi

रुचि का होना हमारे जीवन में काफी महत्वपूर्ण हैं। इससे मनुष्य का लक्ष्य निर्धारण के साथ साथ ही उस लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रेरणा का काम भी करती हैं। बिना रुचि किसी भी कार्य को करना व्यर्थ हो जाता हैं क्योंकि फिर मनुष्य उस कार्य को करने में आँकनी करता है और यदि वह कार्य करने को तैयार हो भी जाता हैं तो वह मन लगा कर नही करता हैं।

जिससे वह बाकियों से पीछे रह जाता हैं। वही यदि वह कार्य मनुष्य की रुचि का हो तो वह जीवन में काफी कामयाबी हासिल कर लेता हैं। इसलिए जो भी कार्य करो मन लगा के करो।

साथ ही एक अंतर करना जरूर आना चाहिए। हर मनुष्य को की वो जीवन में जो भी कर रहा है। वो शौक है या रुचि। इसका अंतर पता होना हर किसी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अपनी रुचि को छोड़ कुछ और करना का कारण :

जैसा कि हम जानते हैं कि कभी कभी बच्चे अपनी रुचि को छोड़ कर कुछ और करने लगते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे –

1. आर्थिक समस्या

2. लिंग की समस्या

3. माता पिता के सपने

आर्थिक समस्या – अक्सर देखा जाता हैं कि कई बच्चे ऐसे घर से रहने वाले होते हैं। जहाँ पर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नही होती। जिससे कारण वश बच्चों को अपनी रुचि का कार्य छोड़ कुछ और करना पड़ता है। जैसे उस बच्चे का मन है बैडमिंटन खेलने का और अपना भविष्य बनने का, किन्तु परिवार की आर्थिक स्थिति को देखा वो अपना मन मर कर कुछ और करने लगता हैं।

लिंग की समस्या – यह समस्या तो जैसे कि कोई आम बात हो गई हो। हर जगह देखने को मिल जाता हैं। जहाँ लड़की को घर से बाहर जाना भी गुनाह है तो वही लड़के मज़े करते हुए रात को घर आते हैं। यह पर भी आप देख सकते हैं कि यदि कोई लड़की पढ़ना चाहें है, तो उसे पढ़ाए, किन्तु नही परिवार वाले कहते हैं इतना पढ़ कर क्या करेगी। करना तो झाड़ू-पोछा ही है तो वही लड़के के पढ़ाई के लिए जमीन-ज़ायदाद तक भी गिरवी रख देते हैं। यह पर भी लड़कीयो को अपनी रुचि के कार्य को छोड़ना पड़ता है।

माता पिता के सपने : अक्सर हमें देखने को मिलता है कि माता पिता के जो सपने पूरे नही होते हैं।उन सपनों को माता पिता अपने बच्चों के द्वारा पूरे होने के सपने देखते हैं। या फिर उनके भविष्य को लेकर फैसले वही लेते हैं कि वो बड़ा होकर क्या करेगा क्या नही।

ऐसे और भी कारण है। जिस वजह से बच्चों की रुचियां कही दाव सी जाती हैं और वह बच्चे आज के समय के साथ तेजी से बढ़ने की वजह पीछे रह जाते हैं। कोई कोई बच्चे यदि माता पिता की रुचि को अपनी रूचि बना भी ले फिर भी उनके अंदर एक खाली पन रह ही जाता है। जिस कारण वह तनावग्रस्त भी हो जाते हैं क्योंकि माता पिता की रूचियों को पूरा करने में वो कही असफल हो गए तो क्या होगा यह सोचते रहते हैं।

निष्कर्ष :

किसी भी मनुष्य या बच्चों के जीवन में रुचि का होना अति आवश्क होता है। इससे उसका जीवन आनंदित रहता है और वह सादा खुश रहता है। भविष्य में कुछ कर दिखने का हौसला होता है। लक्ष्य प्राप्ति की रुकावट को भी तब मनुष्य या बच्चे सब हँसते हँसते पार कर लेते हैं।

मैं ज्योति कुमारी, LifestyleChacha.com पर हिंदी ब्लॉग/ लेख लिखती हूँ। मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हूँ और मुझे लिखना बहुत पसंद है।jyoti kumari best hindi blogger in delhi

-ज्योति कुमारी 

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