मौलिक अधिकार और कर्तव्य पर निबंध | Fundamental Rights and Duties in Hindi

Fundamental Rights and Duties in Hindi

Fundamental Rights and Duties in Hindi – दोस्तों जैसा की आप सभी जानते है कि आज के समय मे सभी देश स्वतंत्र है और उनके अपने अपने लिखित व अलिखित संविधान है वैसे ही हमारे देश भारत का भी एक लिखित और काफ़ी लंबा संविधान है। सभी देशों ने अपने नागरिकों को कई तरह के अधिकार दिए गए है। वैसे ही हमारे देश के नागरिकों को भी कुछ मूल अधिकार दिए गए है जिनके बिना किसी भी व्यक्ति का पूर्ण विकास संभव नहीं है। जो मनुष्य को मनुष्य होने के नाते दिये जाते है।

मौलिक अधिकार का अर्थ- मौलिक अधिकार वे अधिकार  होते है जो व्यक्ति के लिए बहुत आवश्यक है जो संविधान द्वारा नागरिकों को दिए जाते है।

मौलिक अधिकार कानूनी रूप से पूर्ण और असीम होते है इन पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।

मौलिक अधिकारों को व्यक्ति के जन्मसिद्ध व प्राकृतिक अधिकार कहे जाते है। जिनके बिना व्यक्ति अधूरा माना जाता है।जो संविधान द्वारा प्रदान किए जाते है इनका कोई भी उल्लंघन नहीं कर सकता है।

 

मौलिक अधिकारों का इतिहास:

भारतीय नेताओं ने लंबे समय तक साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष करने के कारण उनका झुकाव लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों कि तरफ़ था।उनका मानना था कि मौलिक अधिकार व्यक्ति और समाज के बहुमुखी विकास के लिए अनिवार्य है। 

नेहरू ने 1946 में अपने ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ में कहा था कि हमारे देश के संविधान का लक्ष्य भारत को लोकतंत्र की स्थापना करना है और इसके साथ ही उन्होंने मौलिक अधिकारों की मांग की।भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार का सिद्धांत सयुक्त राज्य अमेरिका से लिया गया है।

मौलिक अधिकार की वर्तमान स्थिति-  मौलिक अधिकार भारत के प्रत्येक व्यक्ति को नागरिक होने के नाते संविधान द्वारा दिए जाते है ।

10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने मानव अधिकारों की घोषणा की। वर्तमान में भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को छह मौलिक अधिकार दिए गए है जो भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 में वर्णित है।(समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार, संवैधानिक उपचारों का अधिकार)।

प्राचीन समय में भारतीय संविधान में सात मौलिक अधिकार थे।संविधान के 44वें संशोधन द्वारा संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से समाप्त करके एक कानूनी अधिकार बना दिया। इसलिए वर्तमान में भारतीय संविधान में छः मौलिक अधिकार है।

 

मौलिक अधिकारों का महत्व:

मौलिक अधिकारों के बिना किसी भी व्यक्ति का पूर्ण विकास नहीं हो सकता।हर व्यक्ति के पास कुछ गुण और और उसकी शक्तियां होती जिनका विकास जरूरी होता है अन्यथा वह अपने जीवन में व्यक्तित्व का सर्वोच्च विकास नहीं कर सकता । नागरिक स्वतंत्रता के बिना लोकतांत्रिक सरकार नहीं चल सकती । यदि नागरिकों को विचार, भाषण, सभा सम्मेलन की स्वतंत्रता ना मिले तो लोकमत का निर्माण नहीं होगा।

मौलिक अधिकार का उल्लंघन खुद विधानमंडल और कार्यपालिका नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें हमारे संविधान में शामिल किया गया है। इनमें संविधान में संशोधन किए बिना नहीं हटाया जा सकता है। भारतीय संविधान में अधिकारों को लागू करने की व्यवस्था की गई है। मौलिक अधिकार देश की मौलिक एकता को प्रकट करते है।हमारे देश में कई मजहब,जाति,और धर्मों के लोग निवास करते है और मौलिक अधिकार सभी को समान रूप से प्राप्त है।

 

मौलिक अधिकारों की विशेषताएं:

भारत में जो लोग रहने आते है उन सभी को चाहे वो भारत के नागरिक हो या न हो कुछ अधिकार दिए जाते है जैसे जान माल की रक्षा। परंतु मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को प्राप्त है जिसके लिए वे न्यायालय में भी जा सकते है।राज्य को कोई भी ऐसा कानून बनाने की अनुमति नहीं होती जिससे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करना अपराध है जैसे- संविधान द्वारा छुआछूत की मनाही की गई है और इस कानून को तोड़ना अपराध है।

ये मौलिक अधिकार वह कानून है जिन्हें अदालतों द्वारा लागू किया जा सकता है न्यायालय कार्यपालिका को आदेश दे कि यदि किसी नजरबंद किए गए व्यक्ति को उसके सामने पेश किया जाए ऐसा न किए जाने पर न्यायालय उस व्यक्ति को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किए जाने पर उसकी रिहाई का आदेश देता है। मौलिक अधिकार असीम नहीं है परंतु संकटकालीन परिस्थिति में इन अधिकारों को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।


मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण-  मौलिक अधिकारों का बंटवारा निम्नलिखित छः भागों में किया जाता है-

 

1. समानता का अधिकार

समानता के अधिकार से मतलब है कि कानून के समक्ष  सभी व्यक्ति समान है और सभी को समान रूप से कानून का संरक्षण प्राप्त होगा।

धर्म, वंश, जाति के आधार पर भेदभाव की मनाही।किसी भी नागरिक को दुकानों, भोजनालय, मनोरंजन, तालाबों और कुओं का इस्तेमाल करने से नहीं रोका जाएगा।

छुआछूत की समाप्ति ऐसा करने वाला अपराधी होगा।महिलाओं, बच्चों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों के लिए राज्य विशेष प्रकार की व्यवस्था कर सकता है।

सरकारी नियुक्तियों के लिए अवसरों की समानता कोई भी नागरिक धर्म, वंश, जाति,जन्म स्थान या निवासस्थान के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराया नहीं जाएगा।

 

2. स्वतंत्रता का अधिकार

सभी नागरिकों को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लेख,रेडियो, टेलीविजन के माध्यम से अपने विचारों को प्रकट करने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

शांतिपूर्वक बिना हथियारों के सम्मेलन करने की स्वतंत्रता। नागरिकों को शांतिपूर्ण इकट्ठा होने की स्वतंत्रता है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र को कोई नुकसान न पहुंचे।

संस्था या संघ बनाने की स्वतंत्रता नागरिकों को राजनीतिक दल, मजदूर यूनियन, किसान संगठन इत्यादि बनाने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

नागरिकों को भारत के किसी भी राज्य या क्षेत्र में घूमने फिरने की पूरी स्वतंत्रता है।

नागरिकों को देश के किसी भी स्थान पर निवास करने व बसने की स्वतंत्रता है।

भारतीय नागरिकों को कोई भी व्यवसाय या कारोबार करने की पूरी आजादी है।

अपराधी को खुद को सही साबित करने का अवसर। किसी भी व्यक्ति को एक अपराध की एक बार ही सजा दी जाएगी।अपराधी को स्वयं के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसका अपराध जानने का अधिकार।

 

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार

किसी भी व्यक्ति से बेगार लेना या जबरदस्ती काम करवाना तथा मानव व्यापार करना गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है।

स्त्रियों, बच्चों, व पुरुषों के क्रय -विक्रय पर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है परंतु इसके बावजूद लोग पिछड़े वर्गों के लोग व महिलाओं को बंधक मजदूर बनाकर आज भी उनका शोषण किया जा रहा है।जिनकी जिंदगी किसी जमींदार या साहूकार के पास गिरवी पड़ी है।

अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से फैक्ट्री या कारखानों में काम नहीं लिया जा सकता है क्योंकि उसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है।

 

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

किसी भी धर्म को मानने या उसका प्रचार -प्रसार करने की स्वतंत्रता।

धर्म के कार्य के प्रबंध करने की आजादी पूजा अर्चना, सत्संग, जनकल्याण हेतु संस्था चलाना।

सरकारी शिक्षण संस्थाओं में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा पर रोक।

 

5. संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार

अल्पसंख्यको को भाषा, लिपि, संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार।

किसी भी व्यक्ति को धर्म, वंश, जाति,व भाषा के आधार पर किसी भी विद्यालय अथवा शैक्षिक संस्थानों में दाखिले में मनाही नहीं होगी।

अल्पसंख्यक वर्ग के हितों की रक्षा करना। शिक्षा संस्थान की स्थापना करने की स्वतंत्रता।

 

6. सवैधानिक उपचारों का अधिकार

डॉ भीमराव आंबेडकर जी ने इस अधिकार को संविधान का हृदय और आत्मा कहा है।

इसके तहत हम अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए न्यायालय में जा सकते है यदि कोई व्यक्ति मौलिक अधिकारों का हनन करे तो ऐसी स्थिति में हाई कोर्ट जा सकते है।

बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश तब जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति को शक के आधार पर गिरफ्तार किया गया हो।तो न्यायालय उसे अपने समक्ष पेश करने का आदेश देता है यदि इल्जाम बेबुनियाद है तो उसे मुक्त करने का आदेश दिया जाता है।

परमादेश तब जारी किया जाता है जब व्यक्ति संस्था, न्यायालय, निगम व सार्वजनिक कर्तव्यों पालन न करें।

प्रतिषेध लेख जब कोई न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जा रहा हो उसे ऐसा करने से रोकने के लिए जारी किया जाता है।

उत्प्रेषण लेख यदि न्यायालय द्वारा किया गया निर्णय न्याय के विरुद्ध है तो फैसले को रद्द करके उसके स्थान पर दूसरा निर्णय किया जाता है।

अधिकार पृच्छा जब कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर गैरकानूनी तरीके से  प्राप्त करता है।

 

मौलिक अधिकार और कर्तव्य | Fundamental Rights and Duties

भारतीय संविधान में नागरिकों को कुछ मौलिक अधिकार प्राप्त है जिससे उन्हें संरक्षण प्राप्त है परंतु इसके बदले नागरिकों के कुछ कर्तव्यों का पालन करना चाहिए जो नागरिकों को एक जिम्मेदार नागरिक बनाते है।

संविधान का पालन करना और राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्र गान का सम्मान व आदर करे।

नागरिकों का कर्तव्य है कि उन्हें ऐसे आदर्शों को अपनाना चाहिए जो राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हमें प्रेरणा दे।

भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता को बनाए रखना।

देश के सेवा और रक्षा के लिए सदैव तैयार रहना।

सभी लोगों में भाईचारे को बनाए रखना।और उन प्रथाओं का बहिष्कार करे जो महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध है।

देश की मिली जुली संस्कृति को बनाए रखना।

प्राकृतिक पर्यावरण वन, झील, नदी, वन्य जीवों की रक्षा करना। प्राणियों पर दया करना।

नागरिकों को वैज्ञानिक और मानववाद की भावना को विकसित करना चाहिए।

सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करे और हिंसा से दूर रहे।

व्यक्तिगत व सामूहिक रूप से सभी क्षेत्रों में उन्नति विकास को बढ़ावा दे।

 

निष्कर्ष-

मौलिक अधिकार किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक है जिसकी रक्षा करना संविधान व सरकार की जिम्मेदारी है परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि सारी जिम्मेदारी सरकार पर डाल दें प्रत्येक नागरिक को सदैव जागरूक रुख अपनाना चाहिए।अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निभाना चाहिए। तभी एक लोकतांत्रिक देश की मजबूती बनी रहेगी।

-पूजा गौतम

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