डॉ. भीम राव अम्बेडकर
Biography

डॉ. भीम राव अम्बेडकर जीवनी – Dr. Bhim Rao Ambedkar Biography in Hindi

Dr. Bhim Rao Ambedkar Biography in Hindi :  डॉ. भीम राव अम्बेडकर एक महान समाज सुधारक थे। डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने ही भारतीय संविधान का निर्माण किया और इन्हे संविधान बनाने में 2 साल 11 माह 18 दिन का समय लगा। डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने ही दलित व पिछड़े लोगों को उच्च वर्ग के लोगो के शोषण से मुक्ति दिलाई थी। उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकार दिलवाये। और महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाई। वे उस समय के एक महान विचारक भी रहे है।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर को भगवान का दर्जा भी दिया जाता है। क्यूंकि इन्होंने सालों से चले आ रहे इतिहास को ही बदलकर रख दिया। अम्बेडकर एक महान समाज सुधारक के रूप में जाने जाते है। चलिए विस्तार से जानते हैं डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने देश के प्रति किस प्रकार योगदान किया।

 

डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जन्म व जन्म स्थान।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। इनका जन्म स्थान मध्य प्रदेश के एक सैन्य छावनी महू के काली पलटन इलाके में हुआ था। और इनके पिता का नाम राम जी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। अंबेडकर अपनी माता-पिता की 14 वी संतान थी। डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था। उच्च वर्ग के लोग इस जाति को अछूत व नीचा मानते थे। और डॉ. भीम राव अम्बेडकर बचपन से ही बहुत ज्यादा प्रतिभाशाली थे। और आज के समय में बाबा साहेब के नाम से भी लोग इन्हें पुकारते हैं।

 

डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जीवन।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जीवन बचपन से ही बहुत भेदभाव पूर्ण रहा है। और समाज में इनके परिवार वालो को हीन दृष्टि से देखा जाता था। इनके पिताजी दादाजी ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे। और इनके पिता जी सूबेदार पद पर थे। लेकिन फिर भी अंबेडकर और उनके परिवार वालों ने बहुत ही ज्यादा अन्याय पूर्ण जीवन व्यतीत किया है।

अबेड़कर के पिता अपने बच्चो की शिक्षा के प्रति जागरूक थे, और वह डॉ. भीम राव अम्बेडकर को समझाया करते थे, कि पढ़ लिख कर तुम इस देश से भेदभाव खत्म कर सकते हो। फिर डॉ. भीम राव अम्बेडकर पढ़ाई में लगाव व तेज होने के कारण परीक्षा में अच्छे नंबरों से प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके बाद भी इनके साथ भेदभाव होता रहा. फिर उन्होंने मीट्रिक परीक्षा पास करके मुंबई विद्यालय में प्रवेश लिया।

मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद समाज में खुशियाँ मनाई जाने लगी। यह सब के लिए बहुत ही बड़ी बात थी क्योंकि वह छोटी जाति के होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई में प्रथम स्थान प्राप्त किया। मैट्रिक परीक्षा पास होने के बाद उन्हें एक समारोह में सम्मानित किया गया. इसके चलते उनके एक मास्टर ने उन्हें गौतम बुद्ध की किताब भेंट की। बुद्ध की शिक्षाओं से वह बहुत ही प्रभावित हुए और बुद्ध का ज्ञान अर्जित किया।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर की शिक्षा।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने उस समय में बहुत ही ज्यादा पढ़ाई की थी। माना जाता है। कि उनके पास 32 डिग्रियां थी, और उन्हें 9 भाषाओं का ज्ञान था। डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से अपनी पीएचडी की उपाधि हासिल की। फिर उन्होंने लंदन में उन्होंने स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में एम. एससी. और डी. एस सी विधि संस्थान में बार-एट-लॉ की उपाधि ग्रहण की।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर को कोलंबिया विश्वविद्यालय में एल एलडी और डी लिट मानव उपाधि से सम्मानित किया। और डॉ. भीम राव अम्बेडकर के नाम के पीछे बहुत ही उपाधि लगाई जाती और ये भारतीय युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल है। इनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति खराब होने के बाद भी उन्होंने खुद की समाज के सामने एक अलग छवि बनाई।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर उस समय के एक प्रशिक्षित अर्थशास्त्री भी थे, और उन्होंने अर्थशास्त्र पर बहुत सी बौद्धिक पुस्तकें भी लिखी।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर का समाज के प्रति योगदान इस प्रकार हैं।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने भारत को राजनीतिक आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक‌, संवैधानिक, सांस्कृतिक, ओद्योगिक, आदि इन सभी क्षेत्रों में अलग-अलग तरीके से कार्य करके भारत को मुक्ति दिलाई। और कम से कम यह कार्य करने में लगभग 65 वर्षों का समय लगा।

 

धार्मिक व सामाजिक

डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने सामाजिक योगदान में अपनी महत्वूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने समाज से कुप्रथाओं को और अंधविश्वास को खत्म किया। दलित आदिवासी लोगों को अधिकार देने के प्रति आवाज उठाई। उन्होंने दलित वर्ग के लिए मंदिर व कुएं से पानी पीने का अधिकार प्राप्त करवाए।

अम्बेडकर ने कुप्रथाओं को मिटाने के लिए मनुस्मृति का भी दहन किया। उन्होंने पत्रपत्रिका के माध्यम से लोगों को जगाने के लिए प्रोत्साहित किया। और साथ-साथ उन्होंने कमजोर वर्ग के लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया और दलित वर्ग के लोगों को आरक्षण दिलवाया। नारियों को बराबरी का हक़ दिलाने के लिए उन्होंने हिन्दू कोड बिल तैयार किया। अम्बेडकर को इस बिल का बहुत ज्यादा विरोध झेलना पड़ा।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने नारियों के साथ हो रहे शोषण से उनको मुक्ति दिलाई, महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया और पिता की संपत्ति में भी उनको बराबरी का हक़ दिया। जाति, धर्म, रंग, लिंग के आधार आदि पर भेदभाव से मुक्ति दिलाई।

 

हिंदू धर्म छोड़ने का निश्चय किया।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने बहुत सोच विचार करके हिंदू धर्म छोड़ने का निश्चय किया। और हिंदू धर्म का पालन करने से मना कर दिया, उनको इस धर्म में समानता की जगह जातिवाद, भेदभाव, पाखंडवाद, अंधविश्वास देखने को मिला। अम्बेडकर ने कहा मैं हिंदू धर्म में पैदा हुआ ये मेरे बस की बात नहीं थी, लेकिन मैं एक हिंदू धर्म में रहकर मरूंगा नहीं ये मेरे बस की बात है। अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर के दीक्षाभूमि में अपने लाखो अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। 6 दिसंबर 1956 को बाबा साहेब डॉ. भीम राव अम्बेडकर की मृत्यु हो गयी।

 

उपाधियां।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर को संविधान की रचना करने के लिए संविधान सभा द्वारा गठित ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष चुने गए और भारत के प्रथम कानून मंत्री बने, और 1990 में, उनके मरणोपरांत उन्हें भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया।

 

डॉ. भीम राव अम्बेडकर द्वारा लिखी गई पुस्तकें –

बुद्ध एंड हिज धम्म।

हू वेयार शूद्र।

थोत्स ऑन पाकिस्तान।

दि प्रॉब्लम ऑफ रूपी।

दि अनार्चेबल्स।

 

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श्याम कुमार दिल्ली में रहते हैं। वह lifestylechacha.com के संस्थापक हैं। जोकि एक हिंदी ब्लॉगिंग वेबसाइट है, और इस वेबसाइट की श्रेणी स्वास्थ्य, सौंदर्य, संबंध, जीवन शैली, जीवनी, आदि है।

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