अरविंद केजरीवाल जीवनी – Arvind Kejriwal Biography in Hindi

Arvind Kejriwal Biography in Hindi : अरविंद केजरीवाल जो कि वर्तमान में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हैं. जो कि एक लोकप्रिय राजनीतिज्ञ है. दोस्तो आज में आपको अरविंद केजरीवाल के बारे में बताऊंगी कि कैसे वो इस पद पर विराजमान हुए और लोगों में कैसे इनकी इतनी लोकप्रियता है.

आम आदमी पार्टी के लीडर अरविंद केजरीवाल जो कि राजनीति में आने से पहले ही सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं. जिन्होंने बिना किसी राजनीतिक पद के भारत की जनता के लिए बहुत सारे कार्य किये और गरीब जनता को भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मजबूत किया. इन्होंने अन्ना हजारे के साथ भी कार्य किया तथा बाद में स्वतंत्र पार्टी का गठन कर चुनाव में खड़े हुए और उसमे भारी बहुमत ले कर जीत प्राप्त की.

 

शुरुआती जीवन :

अरविंद केजरीवाल यह बचपन से ही काफ़ी होशियार रहे हैं. फिर बात पढ़ाई लिखाई की हो या फिर कुछ और, क्योंकि एक बार इनकी तबियत खराब थी और इन्होंने बहस प्रतियोगिता में भाग ले रखा था. क्यूँकि जो इनके साथी थे वो हार न जाए इसलिए ये तबियत खराब होने के बावजूद कम्बल ओढ़ कर स्कूल गए और प्रतियोगिता में भाग लिया. ये ऐसे व्यक्ति हैं जो किसी भी कार्य के लिए सोच ले फिर उससे कर कर ही मनाते है.

इनके माता पिता की यह पहली संतान हैं. जिनका जन्म जन्माष्टमी को हुआ इसलिए घर के सदस्यों ने इन्हें कान्हा नाम कहकर बुलाते थे. केजरीवाल जी का पूरा जीवन उत्तर प्रदेश के हिसार सोनीपत और गाजियाबाद के बीच गुजरा है. इन्हें स्कूल के दिनों में नाटक और बहस प्रतियोगिता में भाग लेने का बहुत शौक़ था औऱ इसलिए यह कॉलेज के दिनों में भी भाग लिया करते थे. इनकी स्कूली शिक्षा हिसार में ही हुई थी.

 

शिक्षा :

सन 1989 में आई आई टी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री अरविंद केजरीवाल ने प्राप्त की. डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पहली नौकरी के रूप में 1989 में टाटा स्टील कंपनी में कार्य किया और इन्हें जमशेदपुर जाना पड़ा. किन्तु इन्हें अपने इस कार्य में ज्यादा मजा नही आया और इन्होंने टाटा ग्रुप के हैड के पास जाकर सोशल वेल फेयर से जुड़कर सामाजिक कार्य करने की इच्छा जताई .

उन्होंने इन्हें मना कर दिया और फिर 1992 में इन्होंने वह नौकरी छोड़ दी. बाद में उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी की और पहले परीक्षा में ही उसे पास कर लिया. जिससे उन्हें आई आर एस मिली.

जिस समय वो जमशेदपुर में थे तब उन्होंने मदर टेरेसा के बारे में खूब सुना था और उनके साथ कार्य करने की इच्छा थी. फिर वो कोलकाता चले गए मदर टेरेसा के साथ कार्य करने के लिए क्योंकि वो उनके कार्य करने के तरीके से काफी प्रभावित थे.

जब उन्होंने मदर टेरेसा के सामने अपनी इच्छा प्रकट की तो उन्होंने उन्हें काली घाट जो कोलकाता में है वहाँ उन्हें कार्य करने के लिए भेज दिया. तब केजरीवाल ने वह 2 महीने तक कार्य किया. वह मदर टेरेसा के मार्गदर्शन से गरीब और अभाव ग्रस्त लोगों की मदद किया करते थे और उनका कहना था कि मदर टेरेसा से मिलना उनके जीवन का एक बहुत बड़ा टर्निंग प्वाइंट था.

 

अरविंद केजरीवाल का व्यक्तिगत जीवन :

देश के लिए कुछ कर जाने का जज्बा उनके अंदर पहले से ही था. जिस समय उनके मित्र विदेश में पढ़ाई करने जाने के लिए सोच रहे थे तब वह देश में ही बस कर कुछ करने के लिए सोच रहे थे. इसलिए उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास की. फिर 1995 मे उनका विवाह हो गया. अरविंद केजरीवाल जी का विवाह सुनीता जी से हुआ था. जो एक आईआरएस अधिकारी है. अब वे आयकर विभाग में कार्यरत हैं. इनके दो बच्चे है एक लड़की हर्षिता लड़का पुलकित है. इनकी माता का नाम गीता देवी है और पिता का नाम गोबिंद राम केजरीवाल है. इनके एक भाई और बहन भी है भाई का नाम मनोज है और बहन का नाम रंजना है.

 

अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफर कुछ इस प्रकार रहा :

करियर : सन 1995 सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास करके केजरीवाल जी आयकर विभाग में जॉइंट कमिश्नर के पद पर नियुक्त हुए और उन्होंने बेहद ईमानदारी के साथ कार्य किया. जब यहाँ पर भी भ्रष्टाचार ने अपनी जड़ें फैलना शुरू कर दिया तो उन्होंने वर्ष 2000 में 2 वर्ष की छुट्टी की अपील की और अपने उच्च शिक्षा की प्राप्ति के बाद इसी पद पे आसीन होने की अनुमति मांगी.

तब वहाँ के अधिकारी ने उनके आगे शर्त रखी कि यदि तुम इस परीक्षा में पास नही हुए तो 2 वर्ष तक जो राशि तुम्हें  दी जायेगी वह वापस करना पड़ेगा और केजरीवाल ने यह शर्त मान ली. सन 2002 में जब वह परीक्षा पास कर वापस आए तो उन्हें उनकी वह पद 1 वर्ष तक वापस नही दी गई उन्हें बार बार टाल दिया गया और आखिर में उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दे दिया.

किन्तु इससे उन्होंने अपना अधिकार पत्र का वादा तोड़ दिया और इस मुद्दे पर कई वर्षों तक प्रशासन में बता चली की केजरीवाल को अपना 2 वर्ष का वेतन वापस करना है या नहीं. अंत मे केजरीवाल ने ही अपने कुछ मित्रों से पैसे उधर लेकर प्रशासन को 9,27,787 रुपये देकर अपनी नॉकरी की छोड़ दिया.

 

राजनीति करियर : आयकर विभाग से इस्तीफ़ा देने के बाद उन्होंने “परिवर्तन” नामक एक संस्था को खोला और गरीब लोगों की मदद की. वह बिजली विभाग और आयकर विभाग से जुड़ी समस्याओं का समाधान करते थे वो भी फ़्री में, उनका कहना था कि यदि कोई भी अधिकारी आपसे रिश्वत मांगता है तो आप सीधे हमारे पास आये, आपका कार्य हम करके देगे वो भी मुफ्त में . ऐसे करके उन्होंने 1 वर्ष में लगभग 800 सौ लोगों की मदद की .

वह कभी भी प्रत्यक्ष रूप से सहायता नहीं करते थे हमेशा अप्रत्यक्ष रूप से ही सहायता करते थे और जो प्रत्यक्ष होते थे वो उनके सहयोगी मनीष सिसोदिया थे. इन्होंने 2003 में फिर से आयकर विभाग में कार्य करना शुरू कर दिया करीब 1वर्ष 6 महीने तक उन्होंने नौकरी की फिर बढ़ते भ्रष्टाचार को देखते हुए इन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.

फिर इसके बाद वो पूरी तरह से परिवर्तनशीला संस्था से जुड़ गए. भारत भ्रष्टाचार के जड़ो को बढ़ता देख अरविंद केजरीवाल ने आर टी आई के मुद्दे को लोगों के बीच लेकर आए. उन्होंने बताया कि इससे अनुसार जनता को अधिकार था कि वह सरकार द्वारा किए गए किसी भी कार्य को लेकर सरकार से सवाल जवाब कर सकती हैं.

 

राज्य स्तर पर किए गए कार्य :

*भारत देश की जनता को आर टी आई से जुड़े अधिकारों को लेकर बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी लेकिन इससे जुड़े अधिकारों की जागरूकता अरविंद केजरीवाल ने लोगों तक फैलाई. इनके अंदर सामाजिक कार्य करने की एक अलग से देशभक्ति की भावना जग चुकी थीं. जब जनलोकपाल बिल पास करने के लिए अन्ना हजारे जी एक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे तब उन्होंने भी उनका साथ दिया और इस आंदोलन को पूरे देश मे फैलाया।

यह सब करते करते न जाने कब इन्होंने सामाजिक चोला छोड़ राजनीतिक चोला पहन लिया पता नही चला किन्तु इनके अंदर की बात को अन्ना हजारे जी पहचान चुके थे. फिर अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे को छोड़कर अपना एक अलग पार्टी का गंठन किया 2012 में जब 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जाती है. इस पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी था.

इस दौरान इनके काफी साथी ने इनका साथ छोड़ दिया और वापस अन्ना हजारे के पास गए तो कुछ ने अरविंद केजरीवाल का ही साथ दिया जैसे मनीष सिसोदिया. जब उन्होंने राजनीति में अपनी पकड़ बना ली, तब उन्होंने 2013 में दिल्ली में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. किन्तु 49 दिनों तक ही इन्होंने कार्य कर के इस्तीफ़ा दे दी लर हार नही मानी अगले चुनाव में भारी बहुमत से जीत प्राप्त की. दिल्ली के चुनाव में उन्होंने 70 में से 67 सीटों पर जीतकर 14 फ़रवरी 2015 में फिर से शपथ ले राजनीति में अपनी वापसी की.

 

अरविंद केजरीवाल जी की उपलब्धिया :

* वर्ष 2004 में इन्हें सामाजिक सहभागिता के लिए अशोक फेलो अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

* 2005 में इन्हें आर टी आई कानपुर, सरकार पारदर्शिता में लाने के लिए उनके अभियान हेतु उन्हें सत्येंद्र दुबे मेमोरियल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

* 2006 में इन्हें एक अलग अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. लोकसभा चुनाव में सीएनएन आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर दिया गया.

* 2009 में आईआईटी खड़गपुर में इन्हें विशिष्ट छात्र नेतृत्व के रूप में अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

* अपने सामाजिक कार्य की लेकर 2013 में अरविंद केजरीवाल “फॉरेन पॉलिसी द्वारा” 100 वैश्विक चिंतन लोगों में शामिल हुए.

* 2014 में विश्व के सबसे प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन द्वारा विश्व के प्रभावशाली लोगों में शामिल किया गया.

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