सुभाष चन्द्र बोस जीवनी | Subhash Chandra Bose Biography in Hindi

Subhash Chandra Bose Biography in Hindi : नमस्कार दोस्तों आपने सुभाष चन्द्र बोस जी के बारे में तो सुना ही होगा। जिन्होंने हमारे भारत को अंग्रेजो की गुलामी से आजादी दिलाने में अपनी एहम भूमिका निभाई। जिनका किरदार हम सभी जानते हैं कि इन्होंने अपनी पूरी ताकत के साथ हमें आजाद करवाया।

सुभाष चन्द्र बोस ने कई सारे नारे भी दिए जिसमें सबसे लोकप्रिय नारा है  “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा” सुभाष चन्द्र बोस ने कई सारी क्रांतियां अंग्रेजो के खिलाफ की। जिन्होंने ब्रिटिश सरकार को हमारा भारत छोड़ने पर मजबुर कर दिया।

रासबिहारी बोस ने 1943 में आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना की। वे भारत को अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद करना चाहते थे। उन्होंने बाद में आज़ाद हिन्द फौज की कमान सुभाष चन्द्र बोस को सौंप दी थी। और वह ब्रिटिश सरकार के साथ युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। जिसके कारण इतिहास में आज सुभाष चन्द्र बोस का नाम इतना प्रचलित हैं। तो अब हम सुभाष चन्द्र बोस की जीवनी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

शुरुआती जीवन।

सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस था वह वकील थे। माता का नाम प्रभावती देवी था। जो एक धार्मिक महिला थी। इनकी माता पिता की कुल 14 संताने थी 8 बेटे 6 बेटियां थीं। सुभाष चन्द्र बोस 9 वे स्थान पर आते थे। सुभाष चन्द्र बोस बचपन में पढ़ाई में होशियार थे। जो हमेशा पढ़ाई में प्रथम स्थान प्राप्त किया करते थे। सुभाष चन्द्र बोस विवेकानन्द से काफी प्रभावित हुआ करते थे। इन्हें नेता जी के नाम से भी जाना जाता है।

 

शिक्षा।

कटक के युरोपीयन स्कूल से प्राइमरी स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद उन्होंने रेवेनशा कॉलेजिएट 1909 में इंटरमीडिएट की परीक्षा बीमार होकर भी उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। 1916 में जब वह बीए ऑनर्स दर्शनशास्र के छात्र थे। उसी दौरान अध्यापकों व छात्रों के बीच कोई झगड़ा हुआ। उन्होंने उनका नेतृत्व संभाला जिस वजह से उन्हें कॉलेज से एक वर्ष के लिए निकाला गया। साथ ही परीक्षा देने के लिए भी पावंदी लगा दी गई।

उसके बाद रेजिमेंट में भर्ती के लिए उन्होने परीक्षा दी। लेकिन उनकी आंखे खराब होने के कारण उन सेना की भर्ती से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने आर्मी की भी परीक्षा दी। उसके बाद उन्होंने सोचा कि कहीं इंटरमीडिएट की परीक्षा की तरह बीए की परीक्षा में भी कहीं नंबर कम ना आ जाए। इसलिए उन्होने बीए ऑनर्स की परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए काफी ज्यादा पढ़ाई करके उन्होंने 1919 में बीए की परीक्षा में प्रथम उत्तीर्ण हासिल की। और कलकत्ता में भी दूसरा स्थान रहा। लेकिन इनके पिता चाहते थे कि वह आईसीएस बने।

लेकिन उनकी उम्र के मुताबिक उन्हें यह परीक्षा एक ही बार में परीक्षा पास करनी थी। उनको उनके पिता ने सोचने का मौका भी दिया फिर उन्होंने फैसला किया कि वह आईसीएस की परीक्षा देंगे। और वह 1919 में इंग्लैंड चले गए। लेकिन उन्हे वहां दाखिला न मिल पाने की वजह से उन्होंने कीसी तरह किड्स विलियम नैतिक व मानसिक ट्रायपास ऑनर्स की परीक्षा को देकर उन्हें प्रवेश मिल गया। लेकिन यह तो बहाना था असली मकसद उन्हे आईसीएस को पास करना था।1920 में इस परीक्षा में भी उन्होंने चौथा स्थान प्राप्त किया।

 

राजनीतिक जीवन।

सुभाष चन्द्र बोस ने द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1939 में यह सोचा कि वह एक जन आंदोलन शुरू करेंगे। इस आंदोलन के लिए उन्होंने लोगो को काफी प्रोत्साहित किया। लोगो को इस आंदोलन से जोड़ने लगे। लेकिन इसके भनक ब्रिटिश सरकार को लगते ही उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस को जेल भेज दिया गया। इस दौरान उन्होंने जेल में खाना तक न खाने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी फिर उन्हे घर पर भेजा गया। साथ ही उन्हें घर पर भी नजरबंदी बना कर रखा गया।

सुभाष चन्द्र बोस एक बहुत ही अच्छे नेता के रूप में उभरे थे। इनके जैसे नेता की जरूरत हर समय ही होगी। वह एक ऐसे वीर सेनानी थे। जिनकी भारतीय इतिहास में बहुत ही गहरी छाप रही है। सुभाष चन्द्र बोस स्वतंत्र अमर सेनानी है। वह भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन योद्धाओं में से एक रह चुके थे। जिनका नाम और जीवन आज भी लाखो करोड़ों देशवासियों को अपनी मातृभूमि के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है।

 

विचार

*तुम मुझे खून दो में तुम्हे आजादी दूंगा।

*सबसे बड़ा अपराध अन्याय को सहना है। और गलत इंसान के साथ समझौता करना है।

*हमारा सफर कितना भी भयानक कष्टदाई बदतर हो सकता है। लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए। सफ़लता का दिन दूर हो सकता है लेकिन उसका आना अनिवार्य है।

*जो अपनी ताकत पर भरोसा करता है। वो आगे बढ़ता है। ओर उधार की ताकत वाले घायल हो जाते हैं।

* मेरा अनुभव है कि कोई न कोई आशा की किरण आती है जो हमें जीवन से भटकने नहीं देती।

*यह हमारा फर्ज है कि हम अपनी आजादी की कीमत अपने खून से चुकाए। हमे अपने त्याग और बलिदान से जो आजादी मिले। उसकी रक्षा करने की ताकत हमारे अन्दर होनी चाहिए।

 

मृत्यु

ऐसा माना जाता है कि 18 अगस्त 1995 एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु ताइवान में हुई थी। लेकिन इनकी मृत्यु का साक्ष्य आज भी नहीं मिल सका इसलिए आज भी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु का विवाद बना हुआ है।

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