शीत युद्ध क्या है? शीत युद्ध का दौर और इसकी उत्पत्ति कैसे हुई ? | About Cold War in Hindi

About Cold War in Hindi : हम आपको अपने इस लेख में शीत युद्ध के बारे में बताने वाले है। जिससे आपको पता चल जायेगा कि शीत युद्ध क्या है ? इसका नाम शीत युद्ध कैसे पड़ा ? यह कब से कब तक हुआ ? किन किन के बीच हुआ और क्यों हुआ ? शीत युद्ध की उत्पत्ति के उत्तरदायी कारक कौन कौन से है ? यह आपको हम अपने इस लेख के जरिए बताएंगे। तो इसे ध्यानपूर्वक अंत तक अवश्य पढ़ें।

शीत युद्ध क्या है ?

दो या दो से अधिक देशों के बीच में जो मानसिक तौर पर लड़ा गया युद्ध। शीतयुद्ध कहलाता है।

या

वो लड़ाई जो बिना किसी अस्त्र शस्त्र के हो। जो केवल मुँह से बोल कर लड़ाई की जाए। उसे शीत युद्ध कहते हैं।

शीत युद्ध का अर्थ –

शीत युद्ध उसे कहते हैं। जिसमे दो व्यक्ति आपस में न लड़ाके केवल अपने दिमाग में ही लड़ते हैं। जैसे – उसे कैसे में पिटुगा, उसे कैसे में बर्बाद करुगा आदि यह वो लड़ाई है। जो लोग लड़ते तो है। लेकिन केवल अपने मस्तिष्क में।

सरल शब्दों में कहे तो जो भी हम किसी से भी लड़ाई करने से पहले अपने दिमाग में जो सोचते हैं जो प्लानिंग करते हैं या बनते हैं। उसे ही शीत युद्ध कहते हैं।

शीत युद्ध इसका नाम कैसे पड़ा ?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद का समय काफी तनाव पूर्ण रहा। जिसे ही सर्व प्रथम बोनोड़ वरिख ने अपने एक भाषण में (जो 16 अप्रैल को अमेरिका में हुआ था) शीत युद्ध कहा और तब से दूसरे विश्व युद्ध के बाद के समय को शीत युद्ध कहा जाने लगा। बोनोड वरिख एक अमेरिका के एक राजनैतिक नेता थे। सबसे पहले शीत युद्ध शब्द का प्रयोग इन्होंने ही किया था।

यह कब से कब तक हुआ ?

शीत युद्ध जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945 में चला था और शीत युद्ध का अंत सोवियत संघ के विखंडन के बाद 1991 में हुआ था।

किन किन के बीच हुआ और क्यों हुआ ?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद उसके परिणाम स्वरूप दो महाशक्तियों का उदय हुआ। पहला अमेरिका था और दूसरा सोवियत संघ था। इन्हीं दो महाशक्तियों के बीच शीत युद्ध हुआ था। जहाँ एक तरफ सोवियत संघ था। तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका था। इनके बीच शीत युद्ध अपना अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए हुआ था। जिसके लिए अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध अंत करने के लिए जापान के दो प्रमुख शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिरा कर जापान को हार मानने के लिए विवश किया था। साथ ही अपना वर्चस्व भी स्थापित किया।

शीत युद्ध की उत्पत्ति के उत्तरदायी कारक कौन कौन से है ?

शीत युद्ध की उत्पत्ति के उत्तरदायी कारक बहुत सारे है। जिसमे से कुछ हम आपको बताने वाले हैं।

1. सोवियत संघ की नीति –

सोवियत संघ (वर्तमान नाम रूस) में जो व्यवस्था है। वो विस्तारवादी होती है। विस्तारवादी का अर्थ – अपने साम्राज्य का फैलाव करना। जो अमेरिका और बाकी राज्य को न पसन्द था।

2. पश्चिमी देशों की विदेशी नीति –

रूस की विस्तारवादी नीति को फिर अमेरिका, बिट्रेन और फ्रांस ने भी अपना ली। जब जर्मनी ने पोलैण्ड पर हमला किया तो बिट्रेन को लगा कि यदि जर्मनी ने इस पर कब्जा कर लिया तो वह उन पर भी हमला कर सकता है और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंतित हो जाता है। अंत वह भी युद्ध में शामिल हो जाता है। वहीं अमेरिका भी इस युद्ध का लाभ उठता है। उसे लगता है कि यह अच्छा मौका है। अपना वर्चस्व स्थापित करने का और वो भी युद्ध में कूद पड़ता है। इस युद्ध से जबकि किसी का भी कोई लेना देना नहीं होता है।

3. संदेह एवं अविश्वास –

मित्र राष्ट्र में जो भी शामिल थे। उनमें आपसी विश्वास नहीं था। उन्हें लगता था कि उनके जीते देश में उनकी नीतियां अपनाई जाए। जैसे रूस चाहता था कि उसके जीते देशों में साम्यवादी व्यवस्था हो क्योंकि यह साम्यवादी विचारधारा को मानते थे। तो वहीं अमेरिका चाहता था कि यह पर पूंजीवादी व्यवस्था हो क्योंकि यह पूंजीवादी विचारधारा को मानते था। यह आपसी मतभेद भी शीत युद्ध का कारण बना।

4. जापान पर परमाणु हमला –

यह हमला ही दूसरे विश्व युद्ध का अंत और शीत युद्ध का आरंभ बनता है। 6/9 अगस्ता को अमेरिका ने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए यह पर फ़ेटमैन और लिटल बॉय नामक परमाणु बम से हमला किया था। जापान के दो प्रमुख शहर हिरोशिमा और नागासाकी पर किया था। जिसका परिणाम यह था कि अब कोई भी देश परमाणु बम का इस्तेमाल करने के लिए हिचकिचाने लगा और अमेरिका को एक महाशक्ति बनने का मौका मिल गया।

5. जर्मनी का मुद्दा –

जर्मनी जो दूसरे विश्व युद्ध में हार गया था और रूस उससे युद्ध में हुए नुकसान का भुगतान चाहता था। किंतु अमेरिका बिट्रेन और फ्रांस इसके समर्थन में नहीं थे। जिसके चलते रूस ने जर्मनी को  दो भागों में बंट गया। एक हिस्सा पूर्वी जर्मनी कहलाया। जो अमेरिका के हिस्से में आया तथा दूसरा हिस्सा पश्चिम जर्मनी कहलाया। जो रूस के हिस्से में आया। इनके बीच की ही यह दीवार बर्लिन की दीवार कहलाई। जिसके एक तरफ अमेरिका थी। एक तरफ रूस, रूस ने जर्मनी की सभी पडुलिपी और आधुनिक तकनीक को अपने साथ ले गया।

6. ईरान का प्रश्न –

अमेरिका, रूस, फ्रांस और बिट्रेन यह सब दूसरे विश्व युद्ध से ईरान को दूर रखना चाहते थे क्योंकि यह एक संवेदनशील इलाका था। यह पर पैट्रोलियम प्रदत्त बहुत ज्यादा थे और इन सबकी नजर अप्रत्यक्ष रूप से ईरान पर थी। इसलिए बिट्रेन और रूस ने यह पर अपने सैनिक तैनात कर दिए। जब दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ। तो बिट्रेन ने अपने सैनिक वापस बुला लिया किन्तु रूस ने ऐसा नहीं किया। सभी को लगने लगा कि रूस को लालच आ गया है।

7. तुर्की तथा यूनान में हस्तक्षेप –

अमेरिका चाहता था कि कोई भी तुर्की और यूनान में हस्तक्षेप न करें। जैसे सभी उपनिवेशिक देश दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हो रहे थे। यह भी स्वतंत्र हो जाए क्योंकि यह पर पहले राजतंत्र था। लेकिन अब अमेरिका लोकतंत्र व्यवस्था स्थापित करना चाहता था। किंतु रूस चाहता था कि यह पर साम्यवादी व्यवस्था स्थापित हो। यह भी शीत युद्ध का कारण बना।

8. युद्धोत्तर उद्देश्य में अंतर –

जितने भी राष्ट्र और देश दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हुए। उन सभी के उद्देश्य अलग अलग थे। जैसे – अमेरिका वर्चस्व स्थापित करना चाहता था तो वहीं बिट्रेन और फ्रांस अपनी सुरक्षा को लेकर युद्ध में उतरे। जो शीत युद्ध का कारण बनी।

9. अमेरिका का दृष्टिकोण –

इसका दृष्टिकोण वहीं था। जो हमने पहले बताया। अपना वर्चस्व स्थापित करना और अपनी पूंजीवादी व्यवस्था या विचारधारा को फैलना।

10. विरोधी विचारधारा –

विरोधी विचारधारा वो थी। जो रूस और अमेरिका के बीच में साम्यवादी और पूंजीवाद को लेकर मतभेद चल रहा था। उसे ही विरोधी विचारधारा कहलाई।

शीत युद्ध के लिए यह सभी कारण उत्तरदायी थे। जिनके चलते तीसरा युद्ध हो सकता था। किंतु नही हुआ क्योंकि दो दो विश्व युद्ध के बाद अब कोई भी और हानि नही सह सकता था। इसलिए जब दो महाशक्तियों का उदय हुआ और आपसी मतभेद भी थे। उसके बाद भी कोई परमाणु बम का इस्तेमाल नहीं करना चाहता था फिर चाहे कितने भी अस्त्र शस्त्र या परमाणु बम हो इनके पास। इसका एक उदाहरण आप क्यूबा मिसाइल संकट को मान सकते हैं। जिसमे दोनों पक्षों ने बिना किसी रक्तरंजित के इस समस्या का समाधान किया।

आशा करती हूं कि आपको यह लेख अच्छा लगेगा और आपको आपके प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे। आपको यह लेख कैसा लगा आप हमें कंमेंट बॉक्स में कंमेंट करके बता सकते है।

मैं ज्योति कुमारी, LifestyleChacha.com पर हिंदी ब्लॉग/ लेख लिखती हूँ। मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हूँ और मुझे लिखना बहुत पसंद है।

(ज्योति कुमारी )

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