Kabir Das Biography in Hindi (कबीर दास की जीवनी)

Kabir Das Biography in Hindi :  कबीर दास सभी कवियों में से एक महान कवि और साथ ही साथ जाने माने समाज सुधारक भी थे। जिन्होंने बहुत सारे दोहे लिख कर लोगो में आपस में प्रेम व भाई-चारे की भावना जागृत की। और उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से लोगों को अन्धविश्वास से बाहर निकालने में एहम भूमिका निभाई थी।

भक्तिकाल के महान कवि कबीर दास ने भारत को एक नई दिशा प्रदान करके एक सकारात्मक सोच दी। इसके अलावा उन्होंने भारतीय समाज में फैले भेदभाव, उंच-नीच, जात-पात का भी खंडन किया। कबीर दास जी को कई भाषाओं का ज्ञान भी था, जैसे ब्रज, हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, खड़ी बोली अवधि आदि। और इन्हीं सभी भाषओं का अध्ययन इनके दोहों व रचनाओं में भी मिलता है। कबीर दास निर्गुण भक्ति से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। कबीर दास के उपदेशों से हर कोई प्रभावित होता है।

चलिए विस्तार से पढ़ते है – Kabir Das Biography in Hindi

कबीर दास जी का जन्म।

वैसे तो कबीर दास जी की जन्म का कोई तिथि नहीं है। लेकिन फिर भी इतिहासकारों के अनुसार इनका जन्म 1839 में काशी में हुआ था। यह माना जाता है कि कबीर एक गरीब विधवा ब्राह्मणी से जन्मे थे। जिसे ऋषि रामानंद भूल से पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। जिसके दौरान विधवा ब्राह्मणी ने समाज के डर से नन्हे से बालक को लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया था। फिर एक महिला ने इस बालक को वहां से रोता देख उठा ले गई थी। जानकारी के अनुसार यह कहा जाता है कि कबीर का पालन पोषण नीरू व नीमा ने किया था। कबीर दास का लालन पालन मुस्लिम गरीब परिवार में हुआ था।

 

कबीर दास की शिक्षा।

आपको बता दे कि कबीर दास बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने दोहों को बोलकर अपने शिष्यों द्वारा लिखवाया करते थे। कबीर बहुत ही ज्यादा गरीब परिवार से थे। जिसके कारण उनको शिक्षा नहीं मिल सकी। लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हे मदरसे में भी पढ़ाने के बारे में सोचा पर गरीबी होने के कारण वह भी उन्हे पढ़ाने लिखाने में असमर्थ रहे। इसके बाद भी उन्होंने अपनी कल्पना शक्ति के बल से दुनिया को वो राह दिखाई। जिसे हर इंसान अपनी लाइफ में अमल करके खुद को सफल बनाने में कामयाब होगा।

 

कबीर दास का विवाह।

कबीर दास का विवाह बनखेड़ी वैरागी की रहने वाली एक युवती लोई के साथ हुआ। विवाह के बाद उनके दो बच्चे हुए। लड़के का नाम कमाल और लड़की का नाम कमाली था। इसी दौरान यह बताया जाता है कि कबीर के घर में साधु संतों का आना जाना लगा रहता था। कहा जाता है कि इनके मत का विरोध उनके पुत्र ने किया था। कबीर दास के घर पर साधु संतो का निरंतर आना जाना लगे रहने की वजह से इन लोगो को भूखा भी रहना पड़ता था। यह माना जाता है कि कबीर ने अपनी बेटी कमाली को और अपनी पत्नी लोई को भी अपना शिष्य बना लिया था।

 

कबीर दास पर स्वामी रामानन्द का प्रभाव।

यह माना जाता है कि कबीर दास किसी भी धर्म को नहीं मानते थे, उनका मानना था कि इंसान का कर्म ही धर्म है। वह बचपन से ही मुस्लिम समुदाय में रहे थे। और उन्हे किसी भी धर्म के बारे में ज्ञान नहीं था। जब वह स्वामी रामानंद के प्रभाव में आकर उन्हें हिन्दू धर्म का ज्ञान मिला इसके बाद उन्होंने स्वामी रामानंद को अपना गुरु माना था। वह किसी धर्म को नहीं मानते थे, लेकिन फिर भी वह हर धर्म के अच्छे विचारो को माना करते थे। इसी कारण उन्हें हर धर्म में मान-सम्मान भी प्राप्त हुआ। उन्होंने हिन्दू भक्तो और मुस्लिम फकीरों दोनों के साथ ही अपना समय व्यतीत किया इसी कारण उन्होंने उनसे अच्छे विचार अर्जित किए।

 

कबीर दास की कुछ विशेषताएं प्रमुख हैं जैसे-

*कबीर दास अपनी स्थानीय भाषा शैली में लोगो को उपदेश देकर समझाया करते थे। वह अपनी हर बात को उदहारण सहित लोगो को सही रूप से समझाते थे। कबीर की वाणी को तीन रूपों में लिखा गया है। रमैनी, सवद, साखी में वर्णन किया गया है। ये बीजक के नाम से प्रसिद्ध है। कबीर ग्रंथावली में भी उनकी रचनाओं का संग्रह मिलता है।

*कबीर दास जी साधु संतो के साथ कई जगह पर जाया करते थे। इसी कारण उन्हें कई सारी भाषाओं का भरपूर ज्ञान हो गया। इस दौरान वह अपने विचारो और अनुभवी को स्थानीय भाषा के शब्दों में उपयोग किया करते थे।

* कबीर दास हमेशा सत्य बोलने वाले निडर व्यक्ति थे। वह कटु सत्य की आलोचना करने से कभी भी नहीं घबराते थे। वह हमेशा सत्य पर ही भरोसा करते थे।

*कबीर ने हमेशा से गुरु का स्थान भगवान से बढ़कर बताया है। कबीर दास हमेशा बोला करते थे, कि गुरु हमेशा अपने शिष्य को मार पिट डाट कर ही उसे सफलता की ओर अग्रसर करता है।

*कबीर दास ने एक आदर्श समाज की हमेशा कल्पना की थी। कबीर ने समाज में हो रहे अत्याचार शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। भारत में एक अपनी अलग पहचान बनाई।

 

भारतीय इतिहास में कबीर दास की सम्मान जनक छवि।

कबीर दास जी 15 वी सदी के महान कवि व संत थे। वह हिंदी साहित्य के विद्वान थे। भारतीय इतिहास में इन्होने अपनी एक गहरी छाप छोड़ी है। जब भी भारत में धर्म, संस्कृति, भाषा का जिक्र होता है तो सबसे पहले कबीर जी के नाम का गुणगान सबसे पहले किया जाता है। क्योंकि भारत में उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को दर्शाया था। और इन्होने अपने दोहों के माध्यम से भारतीय समाज में फैली कुरीति को कम करने के लिए पूरा योगदान दिया। जो भी लोग कबीर पंथी धार्मिक समुदाय को मानते हैं वह कबीर के उपदेशों सिद्धांतों को अपने जीवन में आधार मानते थे।

कबीर के ग्रंथ व साहित्य।

कबीर के नाम से बने ग्रंथ की संख्या अलग-अलग है। इतिहासकारो के मुताबिक कहीं इसकी संख्या 8 ग्रंथो की है तो कहीं 84 ग्रंथो की लिस्ट जारी की है। दूसरी ओर हिन्दुत्व में 71 किताबो की संख्या गिनी गई है। कबीर की साहित्य की वाणी का संग्रह बीजक के नाम से प्रसिद्ध है। इनके साहित्य अरबी, ब्रज भाषा, पंजाबी, अवधि आदि भाषाओं में अनुवाद किया गया है।

 

कबीर दास की प्रसिद्ध रचनाएं इस प्रकार हैं।

महान कवि ने अपनी रचनाओं में भारतीय संस्कृति जीवन से जुड़े कई मुद्दों को बहुत ही रोचक तरीके से अपनी राय स्पष्ट की है। उन्होंने अपनी रचनाएं बहुत ही सरल भाषा में अनुवाद किया है जिसमें सहजता का भाव देखने को भी मिलता है। उनकी अन्य कुछ रचनाओं में भक्ति के अंग, कबीर की वाणी , राम सार, बलख की फ्रेज, ज्ञान सागर, कर्म , आदि का वर्णन किया गया है। इनकी तीन रचनाए प्रमुख प्रसिद्ध हैं। जैसी

*रमैनी

*साखी

*सबद

 

कबीर दास का निधन।

कबीर दास ने अपना पूरा जीवन काशी में ही व्यतीत किया था। लेकिन जब उन्हें अपनी मृत्यु का आभास हुआ तो वह मगहर चले गए थे। माना जाता है कि जिस इंसान की मृत्यु काशी में होती है तो उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। लेकिन कबीर ने हर किसी का इस भरम को तोड़ने के लिए मगहर चले गए थे। और यह भी कहा जाता है कि कबीर के शत्रुओं ने उन्हे जबरदस्ती कबीर को मगहर जाने के लिए बाध्य किया था।

🙏🙏🙏🙏

ये भी पढ़े 👇

ज्योतिबा फुले जीवनी (Jyotiba Phule Hindi Biography)

डॉ. भीम राव अम्बेडकर जीवनी (Ambedkar Hindi Biography)

गौतम बुद्ध जीवनी (Gautam Buddha Hindi Biography)

सम्राट अशोक जीवनी (Samrat Ashoka Hindi biography)

इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें

Jenab Khan

जेनब खान, lifestylechacha.com की लेखक और सह-संस्थापक हैं, वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं और उन्हें लिखना बहुत पसंद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *