नकारात्मक विचारों को कैसे दूर करें – How to overcome negative thoughts in Hindi

# विचार क्या होते हैं?

विचारों का होना या विचारों का आना आप बताओ अच्छी बात है या बुरी एक बार अपने आप से यह प्रश्न करो । कुछ आंसर मिला ! ज्यादातर लोगों को लगा होगा कि विचार आना अच्छी बात हैं तो हम विचारों से दूर क्यों जाना चाहते हैं ! चलो अब इसका आंसर ढूंढने की कोशिश करते हैं 

# विचारों के प्रकार

विचार दो तरीके के होते हैं एक सकारात्मक और एक नकारात्मक विचार स्कारात्मक विचार तो अच्छे हैं पर नकारात्मक विचार बुरे होते है ऐसा ही सबको लगता हैं, हो सकता है कि ऐसा ही होता हैं एक बात बताओ जैसे की हर एक सिक्के के दो पहलू होते है इसी तरह एक चीज़ के दो पहलू होना अनिवार्य है।

*नकारात्मक विचार कैसे होते हैं?

अब यह जानने का प्रयास करते हैं कि आखिर नकरामक विचार कैसे होते हैं? जैसा कि आप सभी जानते हैं कि नकारात्मक विचार बुरे ही होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता कि नकारात्मक विचार बिल्कुल ना आए। क्यूंकि हमारे साथ भूतकाल में कुछ ऐसा हुआ होता है। जिसे हम कभी याद तो नहीं करना चाहते लेकिन फिर भी वह हमारे दिमाग में नकारात्मक रूप से आ ही जाते हैं। जब भी वह बुरे विचार याद आते हैं तो हम परेशान हो जाते हैं। 

ना किसी से बात करने का मन करता है ना ही कुछ खाने पीने का मन करता है। लेकिन ऐसा भी नहीं हो सकता कि हर समय सकारात्मक विचार ही आए। साथ ही ज्यादातर रात को सोते समय नकारात्मक विचार आते हैं क्यूंकि रात को हमारे माइंड को  कुछ ना कुछ सोचने, करने के लिए चाहिए। तो ऐसे में हमें अपनी पुरानी यादें याद आती है परन्तु नकारात्मक ही ज्यादा आती है। क्यूंकि रात में हम सोते समय उन पुरानी यादों को भूलने का प्रयास कर रहे होते हैं।

# नकारात्मक विचार से बचने के उपाय

हमारा जो माइंड है 24 घण्टे तो व्यस्त नही हो सकता है, जैसे की हर कोई बताता हैं, की अपने आप को व्यस्त रखो तो नकारात्मक विचार नही आएंगे। ऐसा नही हो सकता हैं तो अब क्या करें इसी परिस्थिती मैं कैसे न कैसे नकारात्मक विचारों को भूलने की कोशिश करेंगे पर जितना भूलने की कोशिश करेंगे उतना ही याद आएंगे तो अब नकारात्मक विचारों को कम से कम 5 से 10 मिनट तक याद करने की कोशिश करेंगे………

फिर देखते क्या होता हैं। कुछ समझे की नही मेरा मतलब है कि जितना किसी चीज से दूर भागने की कोशिश करेंगे तो उतना ही याद आएंगी और जितना की हम नकारात्मक विचारों को याद करने की कोशिश करेंगे वो उतना ही दूर भागेगें।

# माइंड को समझने का प्रयास करते हैं।

एक अच्छा माइंड आप किसको बोलते या समझते हो अच्छा माइंड जो पूरी तरह से चीजों को सोचे व समझे यही तो पर हम विचारों को ही भूलना चाहते हैं चाहे वो नकारात्मक विचार ही न क्यों न हो एक बात बताओ जो इंसान हर चीज भूल जाता हैं तो हम उस इंसान को क्या बोलते या समझते हैं आप उस शब्द को बहुत अच्छी तरह से जानते होंगे।

# माइंड और विचार

विचार हमारे होते हैं या फिर किसी ओर के एक इंसान के माइंड मैं तो हम किसी ओर से नही अपने आप से लड़ना चाहते है लेकिन लड़ने के लिए तो कम से कम दो इंसान या चीज़ का होना जरूरी हैं पर माइंड और विचार तो एक ही है तो हम अपने आप से तो नहीं लड़ सकते। किसी ने अपने विचारो को देखा है मतलब की टच किया है ? नही ना तो जगह चेंज करने से भी ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि विचार तो हमारे ही माइंड मैं है दुनिया के किसी भी कोने में ही क्यूं ना चले जाए नकारात्मक विचार आना शोभाविक है तो बस इसे समझे नही कोशिश करे।

निष्कर्ष।

दोस्तो आप सभी को नकारात्मकता के विचार आते जरूर है। लेकिन नकारात्मकता को अपने ऊपर इतना हावी ना करें। कि हर समय आपको नकारात्मकता के विचार ही आएं। अपने दिमाग को क़ाबू करना सीखें। अगर आपके मन में नकारात्मक विचार आते भी है तो उसे एक बार सकारात्मक पहलू से भी जरूर सोचें। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

– आकाश रॉय…

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