महिलाओं को भी है पुरषों के बराबर अधिकार
Social Issues

महिलाओं को भी है पुरषों के बराबर अधिकार (Women also have equal rights as men)

Women rights in Hindi : आज इस आर्टिकल में हम पढ़ने वाले है कि महिलाओं को भी है पुरषों के बराबर अधिकार आज के समय में भी लड़कियों को लडको के बराबर नहीं समझा जाता है। जबकि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाई है और कोई भी क्षेत्र महिलाओं से हमारे भारत देश में अछूता नहीं रह गया है। लेकिन हमारे भारत में महिलाओं को फिर भी केवल एक भोग-विलास की वस्तु ही समझा जाता है। कितने विचारकों ने महिलाओं को लेकर आवाज उठाई।  

 

तरह-तरह के आंदोलन हुए। लेकिन आज भी महिलाओं की स्थिति वही है। मुझे बहुत दुःख हो रहा है कि आज भी महिलाओं को हमारे भारत देश में पुरुषों के बराबर मान सम्मान नहीं दिया जा रहा है। डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने भारतीय सविधान के आर्टिकल 14 में महिलाओं को पुरषों के बराबर अधिकार दिया है। और आर्टिकल 15 के तहत महिलाओं के साथ भेदवाव करने पर उन्हें न्याय का अधिकार प्राप्त है। लेकिन आज भी हमारा भारत देश पुरुषवादी मानसिकता को बढ़ावा दे रहा है। रूढ़िवादी सोच ने महिलाओं को पीछे ही रखा है। 

 

हमारे समाज में पुरूषों को उसके कार्य की पूरे समाज में वाहवाही मिलती हैं। जबकि महिलाओं को तो ना के बराबर मिलती है। ऐसे कई उदाहरण है जैसे एक उदाहरण मैं बताना चाहूंगी। गीता बबीता जिन्हें अमीर खान की दंगल फिल्म से पॉपुलर किया गया। इस मूवी में पूरी तरह महिला सशक्तिकरण के बारे में दिखता है। अगर यह मूवी नहीं होती तो क्या हम सब गीता बबीता को जान पाते? नहीं। जिन्होंने इंटरनेशनल अवॉर्ड जीत कर हमारे देश का नाम रोशन किया। ऐसी बहुत सी महिलाएं आज भी है जो इसी तरह हमारे देश को आगे बढ़ा रही है। लेकिन इस पुरुषवादी मानसिकता ने उन्हे लुप्त करके रखा है।

 

महिलाओं को अपनी मर्जी से जिंदगी गुजारने की इजाजत हमारे समाज में नहीं दी जाती। महिलाओं को पूरी तरह पुरूषों पर आत्मनिर्भर रहना पड़ता था। बचपन से लेकर मृत्यु तक शादी से पहले वह अपने पिता और भाई पर आत्मनिर्भर रहती है। उसके बाद उसे अपने पति और बुढापे में अपने बच्चो पर आत्मनिर्भर रहना पड़ता है। क्या यही महिलाओं की जिंदगी है? पुरूषों को तो अपनी मर्जी की ज़िन्दगी जीने का अधिकार प्राप्त है।

 

महिलाएं अगर सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, तो लोग उन पर उंगली उठाते है, उन्हे चरित्रहीन समझ लिया जाता है।। अगर वह देर रात तक घर आती हैं तो उससे सवाल किए जाते हैं। महिलाओं को घूमने की भी आजादी नहीं दी जाती है। भारत में अब भी लिंग भेद एक वायरस की तरह फैला हुआ है।

हमारे देश में अभी भी कई जगह महिलाओं को शिक्षा से भी वंचित रखकर उनका विवाह करवा दिया जाता है। फिर उस महिला के सपने उस चार दिवारी में सिमट कर रह जाते है। बहुत सी महिलाएं पढ़ भी लेती है तो शादी के बाद उसको यह कह कर कि तुम्हारा जीवन झाड़ू बर्तन तक ही है। उसे नौकरी से भी वंचित कर दिया जाता है। चारो तरफ से उसकी आवाज को दबा दिया जाता है।

 

कपड़े पहनने पर उसे रोका जाता है। यह नहीं पहनना वो नहीं पहनना। आज की 21 वी शताब्दी में भी रूढ़िवादी सोच को महत्व दिया जाता है। अगर एक लड़का किसी लड़की से दोस्ती करता है, तो उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। अगर कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ती करती है तो उसे पूरी तरह गंभीरता से लेकर उसके चरित्र पर उंगली उठाई जाती है। अगर लड़का करे तो सही है। वहीं लड़की करे तो गलत है। यह सोच हम सभी को बदलने की जरूरत है। तभी हमारा देश आगे बढ़ सकेगा।

 

नोट

इस लैंगिक असमानता को हम सभी को खत्म करते हुए आगे बढ़ना होगा। अगर हम रूढ़िवाद सोच को बदल कर सभी को समान अधिकार दे कर अपने देश को आगे बढ़ाना होगा। अगर महिलाओ को सभी अधिकार मिल जाए तो हमारे देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता और हमारा देश एक खूबसूरत देश बन जाएगा। लेकिन यह तभी संभव होगा जब हम खुद को बदलेंगे, अपनी सोच को बदलेंगे लैंगिक असमानता को समानता में बदलेंगे।

तो दोस्तो उम्मीद है, कि आप सभी इस आर्टिकल को गंभीरता से लोगे? और सभी महिलाओ को समान अधिकार देकर उन्हे बढ़ावा दोगे। ताकि आने वाले समय में हमारा देश किसी देश से पीछे न रहे।

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जेनब खान, lifestylechacha.com की लेखक और सह-संस्थापक हैं, वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं और उन्हें लिखना बहुत पसंद है।

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